यूपी : दिन में मजदूरी,रात में पढ़ाई…परिवार के साथ से प्रदीप ने रचा सफलता का इतिहास, जानें

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- साधन कम हों तो सपने छोटे मत करो,मेहनत करते रहो..एक दिन वही संघर्ष आपकी पहचान बनेगा
दीपांकुश चित्रांश की रिपोर्ट..सुल्तानपुर/कुछ सपने सुविधाओं से नहीं,बल्कि संघर्ष,परिवार के सहयोग और कभी हार न मानने वाले हौसले से पूरे होते हैं। 36 वर्षीय प्रदीप कुमार वर्मा ने बिना किसी कोचिंग और लाइब्रेरी के दिन में मजदूरी करते हुए और रात में पढ़ाई के लिए समय निकालकर यूपीएसएसएससी जूनियर असिस्टेंट के पद पर सफलता हासिल की।
प्रदीप का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा। ग्राम सभा अहिमाने में गरीब परिवार में जन्म हुआ,मई 2013 में पिता रामप्रताप वर्मा का निधन हो गया। पिता का साया उठने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं,लेकिन प्रदीप ने अपने सपने को नहीं छोड़ा। 2013 की सिपाही भर्ती में अंतिम मेरिट से बाहर हुए। इसके बाद 2022 में रेलवे और लेखपाल भर्ती,जबकि दरोगा भर्ती में भी महज कुछ अंकों से सफलता हाथ से निकल गई। हर असफलता के बाद उन्होंने फिर मेहनत शुरू की।
दिनभर मजदूरी के बाद थका हुआ शरीर आराम मांगता था, लेकिन प्रदीप रात में किताबें खोलकर बैठ जाते थे। परिवार ने भी उनके संघर्ष में उनका हौसला बढ़ाया और कठिन समय में उनका साथ दिया। मां श्रीमती अनारा देवी का आशीर्वाद,भाई-बहनों और पूरे परिवार का सहयोग उनके लिए ताकत बना।आखिरकार वर्षों का संघर्ष रंग लाया। प्रदीप ने साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों,यदि परिवार का साथ,मन में विश्वास और मेहनत का जुनून हो तो सफलता जरूर मिलती है।
युवाओं के लिए प्रदीप की कहानी एक संदेश है—
“साधन कम हों तो सपने छोटे मत करो,मेहनत करते रहो—एक दिन वही संघर्ष आपकी पहचान बनेगा।”



