UK :SVMC ऋषिकेश में अग्नि सुरक्षा को लेकर कार्यक्रम, आग लगने पर घबराएं नहीं, समझदारी और सावधानी से करें बचाव

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  •  अग्नि सुरक्षा को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक
ऋषिकेश : सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास, ऋषिकेश में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्नि सुरक्षा एवं बचाव को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अग्निशमन विभाग के अधिकारियों/फायर स्टेशन टीम द्वारा विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को आग लगने के कारणों, आग के प्रकार, अग्निशामक यंत्रों के उपयोग तथा आपात स्थिति में सुरक्षित बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम में बताया गया कि आग लगने की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है घबराने के बजाय शांत रहना, सही निर्णय लेना और सुरक्षित स्थान तक पहुंचना। विद्यार्थियों को Three P’s—Prevention, Plan and Practice अर्थात रोकथाम, पूर्व योजना और अभ्यास का महत्व समझाया गया।
आग के प्रमुख प्रकार और उपयुक्त अग्निशामक-
विद्यार्थियों को आग के विभिन्न प्रकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि अलग-अलग प्रकार की आग के लिए उपयुक्त अग्निशामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
– Class A Fire: लकड़ी, कागज, कपड़ा आदि ठोस पदार्थों में लगी आग।
– Class B Fire: पेट्रोल, डीजल, पेंट, तेल जैसे ज्वलनशील तरल पदार्थों की आग।
– Class C Fire: ज्वलनशील गैसों से संबंधित आग।
– Electrical Fire: विद्युत उपकरणों, तारों, स्विच या शॉर्ट सर्किट से लगी आग में CO₂ या उपयुक्त Dry Powder Extinguisher का प्रयोग किया जाता है।
– ABC Dry Powder Extinguisher: कई सामान्य प्रकार की आग में उपयोगी होता है, लेकिन प्रत्येक स्थिति में सही अग्निशामक का चयन आवश्यक है।
विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि विद्युत आग या तेल की आग पर पानी डालना खतरनाक हो सकता है।
अग्निशामक यंत्र के उपयोग की जानकारी
फायर एक्सटिंग्विशर के संबंध में विद्यार्थियों को उसके सही उपयोग की मूल जानकारी दी गई। आपात स्थिति में यदि प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अग्निशामक का उपयोग किया जाए तो सामान्यतः PASS—Pull, Aim, Squeeze, Sweep पद्धति अपनाई जाती है—अर्थात पिन निकालना, आग के आधार की ओर नोजल करना, हैंडल दबाना और धार को एक ओर से दूसरी ओर चलाना।साथ ही बताया गया कि बड़ी या तेजी से फैलती आग में स्वयं आग बुझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाकर अग्निशमन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
गैस लीकेज होने पर क्या करें?
कार्यक्रम में घरेलू गैस सिलेंडर एवं गैस लीकेज से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय भी बताए गए।
– गैस की गंध आने पर माचिस, लाइटर या किसी प्रकार की लौ न जलाएं।
– बिजली के स्विच को ऑन/ऑफ न करें।
– यदि सुरक्षित हो तो गैस का रेगुलेटर/मुख्य वाल्व बंद करें।
– दरवाजे-खिड़कियां खोलकर प्राकृतिक वेंटिलेशन होने दें, यदि ऐसा करना सुरक्षित हो।
– सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर बाहर निकालें।
– गैस लीकेज वाली जगह पर मोबाइल फोन या विद्युत उपकरण का उपयोग न करें।
– प्रशिक्षित व्यक्ति/गैस आपातकालीन सेवा या अग्निशमन विभाग को सूचना दें।
विद्युत आग से बचाव
विद्यार्थियों को बताया गया कि एक ही सॉकेट पर अत्यधिक उपकरण लगाना, खराब तारों का उपयोग करना तथा क्षतिग्रस्त प्लग को नजरअंदाज करना आग का कारण बन सकता है।ओवरलोडिंग से बचें, खराब वायरिंग की तुरंत सूचना दें और मोबाइल/लैपटॉप को बिस्तर या गद्दे पर रखकर चार्ज न करें। चार्जिंग के दौरान उपकरण को कठोर एवं समतल सतह पर रखना अधिक सुरक्षित है।
आग लगने पर सुरक्षित बचाव
आग लगने की स्थिति में विद्यार्थियों को निम्नलिखित बातों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया—
1. घबराएं नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दें।
2. तुरंत शिक्षक/स्टाफ के निर्देशों का पालन करें।
3. लिफ्ट का प्रयोग न करें; निर्धारित सीढ़ियों एवं आपातकालीन निकास से बाहर निकलें।
4. धुएं की स्थिति में नीचे झुककर/फर्श के करीब रहकर सुरक्षित रास्ते से निकलें।
5. धुएं वाले कमरे में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करें।
6. निकास मार्ग में धक्का-मुक्की या भगदड़ न करें।
7. बाहर निकलने के बाद दोबारा भवन के अंदर न जाएं।
8. विद्यालय द्वारा निर्धारित Safe Zone/Assembly Point पर पहुंचें।
9. अपने मित्रों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में मदद करें, लेकिन स्वयं को खतरे में न डालें।
10. आग की सूचना तुरंत संबंधित शिक्षक, विद्यालय प्रशासन और अग्निशमन विभाग को दें।
कपड़ों में आग लगने पर—Stop, Drop and Roll
यदि किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाए तो भागना नहीं चाहिए।
Stop – Drop – Roll यानी रुकें, जमीन पर लेटें और सुरक्षित रूप से लुढ़ककर आग बुझाने का प्रयास करें। आसपास मौजूद व्यक्ति सुरक्षित तरीके से मदद करें और आवश्यकता होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
विद्यालय में जरूरी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था
कार्यक्रम में विद्यालयों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने पर भी जोर दिया गया। प्रत्येक मंजिल, प्रयोगशाला एवं संवेदनशील स्थानों पर कार्यशील अग्निशामक यंत्र उपलब्ध होने चाहिए तथा संबंधित स्टाफ को उनके उपयोग का प्रशिक्षण होना चाहिए।आपातकालीन निकास, सीढ़ियां और गेट किसी सामान से अवरुद्ध नहीं होने चाहिए। विद्यालय परिसर के बाहर एक निर्धारित Safe Zone/Assembly Point होना चाहिए, जहां आपात स्थिति में सभी विद्यार्थी सुरक्षित रूप से एकत्र हो सकें।
मॉक ड्रिल का महत्व-
विद्यार्थियों को बताया गया कि फायर मॉक ड्रिल केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि वास्तविक आपात स्थिति के लिए तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों को Emergency Exit, Assembly Point और सुरक्षित निकासी मार्ग की जानकारी होनी चाहिए तथा मॉक ड्रिल में अनुशासनपूर्वक भाग लेना चाहिए।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—
“सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
आग से डरें नहीं, आग से बचाव के नियम जानें और उनका अभ्यास करें।”
विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अग्नि सुरक्षा से संबंधित इन महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने घर-परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि छोटी-सी लापरवाही के कारण होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

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