चमोली: पीपलकोटी टीएचडीसी हादसे को लेकर UKD ने उठाए गंभीर सवाल, 10 दिन में जवाब देने की मांग

चमोली : टीएचडीसी पीपलकोटी–सियासैंण परियोजना में 13 अगस्त 2026 को हुई गंभीर दुर्घटना को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने टीएचडीसी एवं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के प्रतिनिधिमंडल ने घटना से जुड़े सुरक्षा मानकों, श्रमिकों की सुरक्षा तथा परियोजना स्थल पर बरती गई कथित लापरवाहियों को लेकर विस्तृत सवाल उठाते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
विरोध के दौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीएचडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजय वर्मा को स्वयं मौके पर आकर उत्तराखंड क्रांति दल की बात सुननी पड़ी। UKD प्रतिनिधिमंडल ने उनके समक्ष घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल रखे और स्पष्ट किया कि श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा गया—
घटना के समय टनल के अंदर कितने मजदूर मौजूद थे तथा सभी मजदूरों की अटेंडेंस, एंट्री-एग्जिट और रियल टाइम लोकेशन की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।क्या भूगर्भीय सर्वेक्षण में उक्त क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया था? इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
टनल में पानी आने, कमजोर चट्टान अथवा भूगर्भीय स्थिति की जानकारी के लिए प्रोब ड्रिलिंग एवं अन्य जियो-टेक्निकल जांच नियमित रूप से की जा रही थी या नहीं, इसकी रिपोर्ट दी जाए।पानी के रिसाव की निगरानी के लिए लगाए गए सेफ्टी इंस्ट्रूमेंट्स और उनसे प्राप्त संकेतों की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अचानक मलवा अथवा पानी आने की स्थिति में सेफ्टी अलार्म, इमरजेंसी एस्केप सिस्टम तथा एस्केप टनल की व्यवस्था की जांच की जाए।स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कब किया गया और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।यदि भू-स्खलन अथवा जमीन में मूवमेंट के संकेत मिले थे तो समय रहते काम क्यों नहीं रोका गया? इसकी जिम्मेदारी तय की जाए।
टीएचडीसी एवं कार्यदायी संस्था के बीच श्रमिक सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी, इसे स्पष्ट किया जाए तथा दोषियों पर कार्रवाई हो।सेफ्टी ऑफिसर की रिपोर्ट में कोई आपत्ति दर्ज थी या नहीं तथा क्या स्वतंत्र सेफ्टी ऑडिट हुआ था, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
टनल में पूर्व में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर मजदूरों का इमरजेंसी इवैक्यूएशन मॉक ड्रिल कब किया गया था, इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा परियोजना स्थल का सेफ्टी इंस्पेक्शन कब किया गया था, इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पूर्व की घटनाओं की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और यदि रिपोर्ट आई थी तो उसके आधार पर क्या सुरक्षा कदम उठाए गए, इसका जवाब दिया जाए।मृत मजदूरों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा गंभीर घायलों को न्यायोचित मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।
परियोजना की सभी निर्माणाधीन टनलों का विशेष सेफ्टी ऑडिट कराकर तब तक कार्य पर रोक लगाने तथा श्रमिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई।कार्यदायी संस्था HCC द्वारा पूर्व की अन्य परियोजनाओं में भी कथित लापरवाही सामने आने की बात रखते हुए संबंधित मामलों की जांच की मांग की गई।
टीएचडीसी एवं एनटीपीसी से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं की कथित लापरवाहियों एवं अवैध डंपिंग से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई न होने को भी UKD ने गंभीर विषय बताया। उत्तराखंड क्रांति दल ने माँग उठाई कि परियोजना में उपनल के माध्यम से लगे कर्मचारियों का बीमा किया जाय अन्यथा उन्हें टनल के अंदर न भेजा जाय, जिसपर अजय वर्मा ने अतिशीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।
प्रभावित गांव हाट को सेमलडाला पीपलकोटी मोटर मार्ग से जोड़ने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद सड़क संपर्क नहीं होने पर भी तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
UKD ने स्पष्ट किया कि इन सभी सवालों एवं मांगों का लिखित जवाब 10 दिनों के भीतर दिया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा इससे भी बड़ा और व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी टीएचडीसी एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।
UKD ने कहा कि विकास के नाम पर श्रमिकों और ग्रामीणों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी गंभीर घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल के जिला अध्यक्ष युधवीर सिंह नेगी, केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सजवाण, UKD वरिष्ठ नेता कमल किशोर डिमरी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सर्वेश्वर पुरोहित सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।



