UK :परमार्थ निकेतन ऋषिकेश पधारे राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी,  नितिन नबीन, किया मां गंगा का पूजन

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  •  परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी,  नितिन नबीन पधारे, किया मां गंगा का पूज

ऋषिकेश :हिमालय की पावन गोद में स्थित विश्व विख्यात परमार्थ निकेतन में देवभक्ति, देशभक्ति, संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना का दिव्य संगम साकार हुआ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने शुक्रवार शाम पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग कर भारत की आध्यात्मिक विरासत को नमन किया।

इस गरिमामयी अवसर पर उत्तराखण्ड के  मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी, पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष  महेन्द्र भट्ट,  राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखण्ड सरकार  धनसिंह रावत,  विधायक यमकेश्वर  रेणु बिष्ट  सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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इस पावन अवसर पर आचार्य महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, आचार्य महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी कैलाशानन्द जी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य महंत रवीन्द्र पुरी जी महाराज, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी, जगद्गुरु पूज्य स्वामी दयाराम देवाचार्य दास जी महाराज, पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ।इसके अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,प्रदेश अध्यक्ष व राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट,  राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत, पूर्व महापौर ऋषिकेश अनिता ममगाईं, नेहा जोशी,आरुषि निशंक, विनय उनियाल आदि लोग मौजूद रहे।

✨ परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा:
“भारत भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत चेतना है। राष्ट्र निर्माण केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यज्ञ है।”

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🙏 श्री नितिन नवीन जी ने कहा:
“गंगा के तट पर आते हैं तो अपने आप मन शांत हो जाता है, शुद्धता आ जाती है। संतों की परम्परा ने ही विपरीत परिस्थितियों में भारत को दिशा दी है और भारतीय संस्कृति को जीवंत रखा है।”

🌿 राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा सशक्तिकरण एवं वैश्विक शांति पर सार्थक चिंतन के साथ यह आयोजन भारत की सनातन चेतना, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ एवं ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के दिव्य संदेश का जीवंत प्रतीक बना। सभी विशिष्ट अतिथियों एवं पूज्य संतों का रुद्राक्ष के पौधे भेंट कर अभिनन्दन किया गया।

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