यूपी : सिद्धेश्वरनाथ मंदिर सुल्तानपुर में सामाजिक समरसता पर विचार गोष्ठी का हुआ आयोजन

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  • भारतीय सनातन परंपरा में मंदिर समाज को जोड़ने का है एक माध्यम.
  • मंदिर भारतीय समाज की आत्मा : शिवमूर्ति पांडे
दीपांकुश चित्रांश क़ी रिपोर्ट…खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से है जहाँ विवेक नगर स्थित श्री सिद्धेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनपद के ख्यातिलब्ध सर्जन डॉ. रमेश ओझा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे,कार्यक्रम में उन्होंने मंदिरों की उपयोगिता और समाज में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं,बल्कि सामाजिक समरसता, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना के भी प्रमुख केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में मंदिर समाज को जोड़ने का माध्यम रहे हैं,जहाँ व्यक्ति केवल पूजा ही नहीं करता बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझता है।
कार्यक्रम में मंदिर के पुजारी पं. राकेश तिवारी तथा ट्रस्ट के पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। ट्रस्ट की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवमूर्ति पांडे,श्रीमती ममता तिवारी तथा जनपद के प्रतिष्ठित विद्यालय शेमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल के प्राचार्य डॉ.अजय कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और समाजसेवी उपस्थित रहे मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का मंदिर ट्रस्ट की ओर से अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में आयोजित भंडारे में विशेष सहयोग प्रदान करने वाले समाजसेवियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया और उनसे भविष्य में भी मंदिर एवं समाज के प्रति अपने समर्पण को बनाए रखने का आवाहन किया गया। अपने उद्बोधन में शिवमूर्ति पांडे ने कहा कि मंदिर भारतीय समाज की आत्मा हैं।
ये स्थान लोगों को नैतिक मूल्यों,अनुशासन और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज मंदिरों से जुड़ता है तो उसमें सहयोग,सेवा और समर्पण की भावना स्वतः विकसित होती है तो वहीं डॉ.अजय कुमार तिवारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सनातन संस्कृति का मूल आधार ही सामाजिक समरसता और सहअस्तित्व है। मंदिर समाज को जोड़ने वाले ऐसे केंद्र हैं जहाँ से सेवा,शिक्षा और संस्कार की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग मिलकर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को सशक्त बनाएं,तो यह न केवल संस्कृति के संरक्षण में सहायक होगा बल्कि नई पीढ़ी को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं बल्कि समाज के उत्थान और समरसता को मजबूत करने का माध्यम भी है। कार्यक्रम का आयोजन श्री सिद्धेश्वरनाथ ट्रस्ट के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।
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