UK : ऋषिकेश में “धरोहर संवाद” में दिखी उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक

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  • पहाड़ी व्यंजनों से लेकर ढोल-दमाऊ और जागर तक पर हुई चर्चा, पारंपरिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर
ऋषिकेश : अपनी धरोहर न्यास की ओर से मंगलवार को मुनिकीरेती स्थित स्वामीनारायण आश्रम में दो दिवसीय ‘धरोहर संवाद’ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों, लोक वाद्यों और सांस्कृतिक परंपराओं पर चर्चा के साथ इनके संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ यूकेएसएसएससी के चेयरमैन गणेश सिंह मार्तोलिया, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, मुनिकीरेती नगर पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, स्वामीनारायण आश्रम के महंत सुनील भगत व नगर उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेश भट्ट  ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम के पहले दिन उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी भोजन और व्यंजनों पर चर्चा हुई। पहाड़ी व्यंजनों पर कार्य कर रहीं मधु असवाल ने उड़द की दाल से लेकर सोयाबीन की पहाड़ी बड़ी तैयार करने की पारंपरिक विधि और वर्तमान समय में इनके महत्व की जानकारी साझा की। उन्होंने पारंपरिक खानपान को स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति से जोड़ने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।कार्यक्रम में उत्तराखंड की पारंपरिक वाद्य संस्कृति की भी प्रस्तुति हुई। चंद्रबदनी से डॉ. सोहनलाल ने तांबे के ढोल, बूढ़ा केदार से बचन दास ने चांदी के ढोल तथा बागेश्वर से मोहन दास और विजय सार ने लकड़ी के ढोल के साथ प्रस्तुति दी। वहीं अल्मोड़ा से हुड़के के जागर विशेषज्ञ सुंदर दास ने प्रस्तुति देकर लोक परंपरा की झलक दिखाई।
प्रस्तुतियों के दौरान पारंपरिक वाद्यों की विशेषताओं, उनके निर्माण, वादन की तकनीक और उनसे जुड़ी परंपराओं की जानकारी भी साझा की गई। आयोजन के माध्यम से ढोल-दमाऊ और अन्य लोक वाद्यों के पीछे मौजूद पारंपरिक ज्ञान, कारीगरी और सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इस अवसर पर अपनी धरोहर न्यास की ओर से स्मारिका का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गणेश सिंह मार्तोलिया ने कहा कि पलायन की चुनौती से जूझ रहे उत्तराखंड में अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण बड़ी चुनौती है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस तरह के आयोजन लगातार और व्यापक स्तर पर होने चाहिए।
अपनी धरोहर न्यास के अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि संस्था उत्तराखंड के पारंपरिक ढोल-दमाऊ और संस्कृति से जुड़े विभिन्न तत्वों के संरक्षण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022, 2024 और 2026 में श्री गोल्ज्यू यात्राओं का आयोजन किया गया। इन यात्राओं के माध्यम से उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों, मध्य हिमालय, उच्च हिमालय, शहरों और गांवों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य संस्कृति संवर्धन से जुड़ी यात्राओं और आयोजनों के माध्यम से देशभर के लोगों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।कार्यक्रम में ऋषिकेश नगर निगम अध्यक्ष शंभू पासवान, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, टीएचडीसी के मुख्य तकनीकी अधिकारी एलपी जोशी, जीएस पटवाल, चंपावत के गोल्ज्यू उपासक श्याम सिंह कार्की, सुनीता पंवार, डॉ. प्रमोद उनियाल, मधु असवाल, संस्कृति कर्मी प्रो. डीआर पुरोहित, डॉ. नवीन पंत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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