तेरहवीं के दिन जिंदा लौट आया गिरधर बिष्ट, तो शव किसका था ?

- पुलिस ने रद्द किया गिरधर बिष्ट की हत्या के आरोप में दर्ज हुआ मामला
- तेरहवीं के अगले दिन जिंदा लौट आया था बिष्ट
- 7 लोगों के खिलाफ हुआ था मामला दर्ज
- घर वालों ने की थी पहचान झील में मिला शव
साहिबाबाद/गाजियाबाद : कौशांबी थानाक्षेत्र के वैशाली सेक्टर 2 स्थित कल्पना अपार्टमेंट निवासी गिरधर सिंह बिष्ट की हत्या के आरोप में सात लोगों पर दर्ज हुए मामले को मसूरी पुलिस ने रद्द कर दिया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर मसूरी पुलिस ने उच्चाधिकारियों को भेज दी है। वहीं, गिरधर के परिजनों ने सदमे में रहने के दौरान गलत पहचान करने और गिरधर ने मानसिक तनाव में आकर जेल से निकलकर आश्रम जाने का बयान दिया है। इसके बाद से हत्या के मामले में नामजद सभी आरोपियों ने राहत की सांस ली है।
16 मई को सोसायटी के बाहर ऑटोमोबाइल की दुकान संचालित करने वाले सुनील के सिर में हथौड़ी मारने के आरोप में पुलिस ने गिरधर सिंह बिष्ट को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से आदेश होने के बाद 17 मई को जेल भेजा था। 21 मई को निजी मुचलके के आधार पर डासना जेल, गाजियाबाद से गिरधर रिहा हुआ, लेकिन घर नहीं पहुंचा। परिजन तलाश करते रहे और कुछ पता न चलने पर मसूरी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। वहीं, 12 जून को मसूरी की नाहल झाल में एक अज्ञात शव मिला, पुलिस ने जब परिजनों को पहचान के लिए बुलाया तब कपड़े देखकर गिरधर की मां देवकी देवी और बहन आशा ने गिरधर के तौर पर शव की शिनाख्त की। इसके बाद हत्या का आरोप लगाते हुए ऑटो मोबाइल दुकान संचालक सुनील, सुशील और अनिल समेत सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई। सनसनी तब फैली जब 24 जून को परिवार वालों ने गिरधर की तेरहवीं की और 24 जून को ही सुबह वह जिंदा वापस अपने घर पहुंचा।
एसीपी मसूरी अजय सिंह ने बताया कि गिरधर ने लोगों से परेशान होकर पंजाब स्थित आश्रम में जाने की बात कही। साथ ही परिवार का कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद से वह सदमे में थे अचानक शव मिलने की बात जब पता चली तब वह सदमे के चलते गलत पहचान कर ली। बताया कि मामले में हत्या की प्राथमिकी रद्द कर दी गई है।
किसका था नाहल झाल में मिला शव ?
गिरधर सिंह बिष्ट की मौत का मामला तो सुलझ गया, लेकिन 12 जून को नाहल झाल में मिला शव वह शव किसका था जिसका अंतिम संस्कार भी हो चुका है। पुलिस आज भी उसकी पहचान नहीं कर पाई है। अलग-अलग थानों व आसपास के जिलों में पंफ्लेट भी भेजे गए हैं और जिपनेट पर भी जानकारी अपलोड की गई है लेकिन अब तक पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया है।



