UK : एक ऐसा महात्मा जो तपा रहा है खुद को तपस्या में विश्व शांति के लिए, जानें

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  • 14 जनवरी से 15 मई तक पंचाग्नि साधना में लीन हैं अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज
  • हर वर्ष चिल चिलाती धूप अग्नि कुंड के बीचों बीच अपने आप को तपा रहे हैं अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज
  • बेहद कठिन साधना मानी जाती है पंचाग्नि साधना, मौन ब्रत रहना पडता है, अनुशासन में 
महाराजश्री साधना के समय लीन अवस्था में

ऋषिकेश :(मनोज रौतेला) अगर  आध्य्तम देखना है, तप, तपस्या साधना देखनी है तो उत्तराखंड आईये…साक्षात दर्शन होंगे आपको. जी हाँ…..गंगा किनारे पहाड़ों के बीच देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा महात्मा हैं जो अपने आप को इस तपती गर्मी में तपा रहे हैं. साधना कर रहे हैं, तपस्या कर रहे हैं. उद्देश्य विश्व शांति बनी रहे. लोगों का भला हो…लोगों पर  ईश्वर अपना आशीर्वाद बनाए रखे. ये महात्मा वर्ष भर में विदेश  यात्रा पर रहते हैं. खुद को अलग-अलग देशों के लोगों से मुलाकात कर रु-बरू कर हिंदुत्व की पताका फहरा रहे हैं. सनातन धर्म की धवजा को सर्वोपरि रख कर अलग-अलग देश, धर्म सम्प्रदाय के लोगों से मिलते हैं.  जनवरी से लेकर मई तक अपने आश्रम में तपस्या में बैठे रहते हैं.जिसने पंचाग्नि साधना कहते हैं. चारों तरह अग्नि कुंड अग्नि प्रजव्लित होती है और बीच में महाराजश्री विराजमान रहते हैं. फिर होते है मन्त्रों, जप, ध्यान, पूजा का अद्भुत कर्म…जिसे देखने के लिए लोगों का हुजूम लगा रहता है. लेकिन अनुशासन के साथ…इस दौरान ये किसी से बोलते नहीं, बात नहीं करते…सिर्फ इशारों में बात करते थे. भक्तों से उनके सहायक मदद करते थे क्या बात कर रहे हैं. इस दौरान सैकड़ों देश विदेश से भक्त यहाँ पर पहुँचते हैं. साधना करते हैं. योग करते थे. सीख कर जाते हैं. महाराजश्री का आशीर्वाद ले कर जाते हैं.  स्वामी समर्पण आश्रम, तपोवन में समर्पण स्कूल ऑफ योगा एंड तंत्र के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय योग एवं कुंडलिनी क्रिया योग महोत्सव का दिव्य आयोजन भी कुछ दिन पहले संपन्न हुआ. इस पावन महोत्सव में विश्व के विभिन्न देशों जैसे स्पेन, अर्जेंटीना, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, रूस आदि से साधक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागिता कर रहे हैं। इस प्रकार आश्रम एक वैश्विक आध्यात्मिक संगम का केंद्र बन गया है, जहाँ विभिन्न संस्कृतियों के साधक योग के माध्यम से एकता का अनुभव कर रहे हैं. यह तपस्या अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा किया जा रहा है.  जो प्राचीन भारतीय योग परंपरा के अनुसार साधना का संचालन कर रहे हैं. उनके सान्निध्य में साधक केवल योग की विधियाँ ही नहीं, बल्कि उसके गूढ़ आध्यात्मिक आयामों का भी अनुभव कर रहे हैं.

पूजा, हवन करते हुए महाराजश्री में
इस दौरान विशेष रूप से, योगिनी अनामिका, जो गुरुजी की अत्यंत निकट शिष्या हैं, इस महोत्सव में सक्रिय रूप से सहयोग करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन एवं नेतृत्व कर रही हैं.  उनके समर्पण और साधना से पूरे आयोजन में विशेष ऊर्जा और अनुशासन का संचार हो रहा है. महाराजश्री के अनुसार,  “भारत सदैव विश्व गुरु रहा है और योग की इस दिव्य परंपरा के माध्यम से पुनः विश्व को दिशा देने में समर्थ है.  योग केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक सम्पूर्ण कला है. यह संसार (संसारिक जीवन) और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन स्थापित करता है. योग हमें अपने आंतरिक स्वरूप, अपनी क्षमता और अपने भीतर स्थित दिव्य प्रेम को जानने का मार्ग प्रदान करता है. यह आत्मबोध, शांति और सार्वभौमिक एकता की ओर ले जाने वाला विज्ञान है. आज के युग में योग केवल परंपरा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकता है.आइए, योग को अपनाएं—एक सुंदर, सार्वभौमिक विज्ञान के रूप में, जो विश्व शांति, प्रेम और समरसता का मार्ग प्रशस्त करता है
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