UK : नंदा राजजात यात्रा 2026 समापन के बाद वापस लौटी डोलियाँ, कुरुड़ में हुआ विधि विधान से समापन

कुरुड़ में यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का विधिवत समापन किया गया

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  • इस बार यात्रा में ३ खाडू थे, हर १२ वर्ष में होती है ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा, 
  • कुमाऊं और गढ़वाल में देवी मानते हैं जो ससुराल जाती है कैलाश की तरफ नंदा देवी 

चमोली :  #हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित पवित्र #होमकुंड में #नंदा #देवी बड़ी #जात #यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ। त्रिशूली और नंदा घुंघटी की पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में जैसे ही देव डोलियां और श्रद्धालु पहुंचे, पूरा क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। २३ सितम्बर को समापन हुआ कुरुड़ में.  इससे पहले होमकुंड में नंदा-भगवती की विशेष पूजा और अनुष्ठान शुरू हुए. पुजारी और पंडित मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ सहित अन्य पुजारियों ने धार्मिक विधि-विधान संपन्न कराया.

  • अवधि: यह यात्रा लगभग 19 से 22 दिनों तक चलती है
  • कुल दूरी: लगभग 280 किलोमीटर
  • विशेषता: इसमें चार सींग वाला पवित्र #चौसिंग्या #खाडू (भेड़) मां नंदा का नेतृत्व करता है
  • मार्ग: #चमोली जिले के नौटी/कुरुड़ गांव से शुरू होकर #रूपकुंड होते हुए #होमकुंड तक
इस दौरान बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला, आयोजन समिति और मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे…शीला समुद्र में स्नान और पूजा के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदा देवी की डोलियां-छंतोलियां तथा यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड पहुंचे। यहां पुजारियों ने विधि-विधान के साथ नंदा-भगवती की विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान कुछ भक्तों पर देवी-देवताओं का अवतरण भी हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने मां नंदा का आशीर्वाद मानकर दर्शन किए।होमकुंड में बड़ी पूजा के बाद यात्रा का सबसे भावुक पड़ाव आया। तीन चौसिंगा खाड़ुओं को विशेष रूप से सजाया गया। उनकी पीठ पर मां नंदा को अर्पित किए जाने वाले पवाड़े के रूप में खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री रखी गई।
मंत्रोच्चार और मां नंदा के जयकारों के बीच इन चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस भावुक विदाई के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।होमकुंड में मुख्य धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद देव डोलियां और छंतोलियां  वापस हुई और कुरुड़ में समापन हुआ. यात्रा जामुन डाली से होते हुए सुतोल समेत विभिन्न पड़ावों पर पहुंच रही है। रास्ते में गांवों के ग्रामीण पारंपरिक तरीके से देव डोलियों और श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहे हैं।घने जंगलों से गुजरती इस कठिन यात्रा में तातड़ जैसे पड़ावों पर स्थानीय देवताओं की पूजा-अर्चना भी की जा रही है।यात्रा अब लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। जगह-जगह ग्रामीण देव डोलियों के स्वागत के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अपनी मनौतियां मांग रहे हैं।
वहीं देवराड़ा-थराली की डोली भी अपने पारंपरिक पड़ावों से होते हुए सिद्धपीठ देवराड़ा की वापसी यात्रा पर होते हुए समापन हुई.  ल्वाणी, कांडे, बमणबेरा और उलंग्रा के बाद डोली बेराधार की ओर पहुंची, जहां ग्रामीणों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया। बड़ी जात यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंची। 23 सितंबर को दशोली और बंड की देव डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंची। यहां यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का औपचारिक समापन हुआ ।करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा, हिमालयी पड़ावों, देव डोलियों, चौसिंगा खाड़ुओं और आस्था से जुड़ी इस यात्रा का होमकुंड पड़ाव एक बार फिर उत्तराखंड की गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखा गया।CRDT: अतुल्य उत्तराखंड पेज 
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