UK : बागेश्वर में दो जनपदों के ग्रामीण करेंगे अनोखा शांतिपूर्ण प्रदर्शन, नरगोली से बेरीनाग तक बनेगी 8 किमी मानव श्रृंखला

हद है, सरकार सुधारीकरण नहीं कर पा रही है, जनप्रतिनिधि खामोश !

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  • तीन दशक से सड़क का इंतजार, 23 अगस्त को नरगोली से बेरीनाग तक बनेगी 8 किमी मानव श्रृंखला
  • राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दो जनपदों के ग्रामीण करेंगे अनोखा शांतिपूर्ण प्रदर्शन, तिरंगे के साथ गाजे-बाजे से होगा आंदोलन
  • दी चेतावनी….विद्यानसभा चुनाव होने से पूर्व यदि नही हुआ काम शुरू तो कम्स्यार घाटी  वासी लेगें कूलूर नदी में  जलसमाधि
  • समिति ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा
  • कम्स्यार घाटी से उठ रही आवाज कहीं विधानसभा चुनाव परिणाम को प्रभावित न कर दे
  • सड़क  एक तरफ का हिस्सा बागेश्वर जिले में दूसरा पिथ्रौरागढ़ जिले में आता है
कांडा/बागेश्वर : दुनिया चाँद पर पहुँच गयी और दुर्भाग्य से अपनी सड़क के सुधारीकरण के लिए आन्दोलन करना पड़ रहा है उत्तराखंड के कम्स्यार घाटी के लोगों को. ग्रामीण इतने ब्यथित हैं, आंखिर तय हुआ आन्दोलन करेंगे, सड़कों पर उतरेंगे.  पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत पौँसा पोस्ताला व बागेश्वर जनपद के कमस्यारघाटी की लाइफलाइन मानी जाने वाली नरगोली-चंतोला-पौंसा-पोस्ताला-बेरीनाग मोटर मार्ग के डामरीकरण और सुधारीकरण की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सड़क की बदहाली के विरोध में आगामी 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर अपने समय में कई अधिकारियों  से लेकर साक्षरता के मामले में रहे प्रसिद्द गाँव नरगोली (बागेश्वर जिले में) से बेरीनाग (पिथौरागढ़ जिले में) तक करीब 8 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बागेश्वर और पिथौरागढ़ दोनों जनपदों के ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि, युवा, महिलाएं और क्षेत्रवासी शामिल होंगे। इन ग्रामीणों का दुर्भाग्य है जो ये दो जनपदों की सीमा पर निवास करते हैं….सरकार की जो नीतियां बनती हैं मुख्यालय के आस पास के गाँवों तक वे पहुँच पाती हैं…या फिर जहाँ का विधायक है वहां तक….विकास हो रहा होता है उसी घाटी तक. दूसरी तरह की घाटी की तरफ  मुंह फेर देता है विधायक भी. ग्रामीणों का कहना है,  कितने चक्कर इलाके में लगाये जनप्रतिनिधि ने ? पता करेंगे तो समझ आ जायेगा सब. ग्रामीण कह रहे हैं, घदेरा पार करने में डर लगता है विधायक को. कहने को मुख्यमंत्री का ख़ासम ख़ास….काम देखो तो आन्दोलन करना पड़ रहा है. 
मानव श्रंखला बनाकर आंदोलन के माध्यम से ग्रामीण देश की प्रगति और सीमांत क्षेत्रों की जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सामने रखने का प्रयास करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर देश चांद तक पहुंच चुका है और अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर जनपद की सीमांत कमस्यारघाटी के ग्रामीण आज भी पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब तीन दशक से सड़क के डामरीकरण की मांग उठती रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।मानव श्रृंखला की तैयारियों को लेकर पौंसा-पोस्ताला पंचायत घर में सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों जनपदों के पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपीं।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डीआर टम्टा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी क्षेत्रवासियों से आंदोलन में स्वप्रेरणा से शामिल होने की अपील की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। मानव श्रृंखला के दौरान तिरंगे झंडे के साथ गाजे-बाजे और नारों के माध्यम से सड़क के डामरीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली से रोजमर्रा की आवाजाही, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादों के परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद सड़क को पक्का करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
बैठक में संघर्ष समिति के संरक्षक एवं पूर्व प्रधानाचार्य मनोहर सिंह रौतेला, गोविंद बल्लभ उपाध्याय, अजय उप्रेती, ग्राम प्रधान भूपाल राम, राजेश बनाई, भगवान राम, भास्कर कुमार, मनोज राठौर, हरीश डसीला, भगवान मेहरा, पूरन सिंह बोरा, भूपाल खाती, मनोज रौतेला, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील रावत, महेश राठौर, सुनील रौतेला, पंकज डसीला, मोहित उप्रेती, गोकुल नगरकोटी, राकेश रौतेला, तनूज उप्रेती, प्रवीण रौतेला दीपक सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।संघर्ष समिति ने कहा कि 23 अगस्त का मानव श्रृंखला कार्यक्रम किसी एक व्यक्ति या गांव का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरी कमस्यारघाटी और दोनों जनपदों के सीमांत ग्रामीणों की सामूहिक आवाज है। समिति ने क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों, युवाओं, मातृशक्ति, व्यापारियों और आम लोगों से इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया है।ग्रामीणों का कहना है कि तीन दशक से कच्ची सड़क के भरोसे चल रहे क्षेत्र को अब आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क के डामरीकरण और स्थायी सुधारीकरण की जरूरत है। मानव श्रृंखला के माध्यम से शासन-प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाकर ग्रामीण अब निर्णायक पहल की उम्मीद कर रहे हैं।
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