UK : ऋषिकेश की पत्रकारिता के स्तम्भ माने जाने वाले हरीश तिवारी का निधन

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ऋषिकेश : पत्रकारिता जगत की बात करें तो ऋषिकेश से दुखद खबर आ रही है. बरिष्ठ पत्रकार हरीश तिवारी का निधन हो गया है. अगर ऋषिकेश में कोई खबर में चर्चा वार्ता करनी हो तो हरीश तिवारी से बढ़िया शायद ही  कोई होगा…एक सुलझे हुए पत्रकार.  मदद जिसकी करनी खुल कर करनी है, सहयोग किसी का करना हो तो खुल कर…खबर पर पकड़ और खबर की समझ के मामले में उनके आगे पीछे शायद ही कोई हो शहर में…उनके साथ खबरों की चर्चा करने का अलग ही आनंद हुआ करता था. फोटोग्राफी का विशेष उन्हें शौक था, फोटो खिंचवाना और खींचना,  फोटो का एंगल क्या होना चाहिए, उन्हें बखूबी जानकारी थी. मंगलवार को उनके अचानक जाने से पत्रकारिता का एक बड़ा खालीपन तीर्थनगरी ऋषिकेश को देखना पड़ा है.  जिसे भरने में शायद वर्षों लग जाएँ…. या यूं कहें,  ऋषिकेश की पत्रकारिता के एक दौर का अवसान है उनका जाना. उनसे आप जब भी बात करेंगे उसमें गंभीरता रहती थी. इस बीच वे कब मजकिये लहजे में अपनी बात कह देते थे ऐसा हुनर हर किसी के पास नहीं होता है. 

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तीर्नथनगरी ऋषिकेश की   पत्रकारिता के स्तंभ माने जाते थे वे. ऋषिकेश प्रेस क्लब (RPC) के संस्थापक अध्यक्ष व दैनिक जागरण ऋषिकेश के पूर्व प्रभारी हरीश तिवारी का आज सुबह निधन हो गया। उन्होंने एम्स ऋषिकेश में अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे।लम्बे समय से डायलसिस चल रहा था, अभी कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था. 

उनका परिवार मूलतः कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले से  ताल्लुक रखता है. उनके पिता स्वर्गीय देवी दत्त तिवारी  फ्रीडम फाइटर थे. उनका परिवार ऋषिकेश शिफ्ट हुआ. वर्तमान में ऋषिकेश में आशुतोष नगर में उनका निवास है. उनकी ससुराल  हल्द्वानी में है. तिवारी अपने पीछे दो बच्चे जिनमें एक बेटा और बेटी और पत्नी को छोड़ कर गए हैं. बेटा वन विभाग में दरोगा के पद पर है तो बेटी नर्सिंग अधिकारी के तौर पर पटना एम्स में कार्यरत हैं. अभी कुछ महीने पहले उन्हूने बेटी की शादी की थी.

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हरीश तिवारी लंबे समय तक दैनिक जागरण ऋषिकेश में प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दी। निर्भीक, निष्पक्ष और जमीनी पत्रकारिता के लिए वह पूरे क्षेत्र में जाने जाते थे। ऋषिकेश प्रेस क्लब की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही और संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पत्रकारों को एकजुट कर संगठन को नई पहचान दिलाई। उनके निधन की खबर मिलते ही पत्रकारिता जगत और सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। हरीश तिवारी ने अपने लेखन और व्यवहार से हमेशा यह संदेश दिया कि पत्रकारिता का धर्म सच को जनता तक पहुंचाना है। उनके मार्गदर्शन में निकले अनेक युवा आज पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं।ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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