UK :ढोल-नगाड़ों की गूंज और पुष्पवर्षा के बीच रवाना हुई आठवीं छड़ी यात्रा

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- प्राचीन मठ-मंदिरों को पहचान दिलाने और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प
- उत्तराखंड के चार धाम सहित जागेश्वर, बागेश्वर, पूर्णागिरि और आदि कैलाश समेत प्रमुख तीर्थस्थलों से होकर मायापुरी हरिद्वार में होगा यात्रा का समापन
ऋषिकेश : उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक विरासत, प्राचीन मठ-मंदिरों और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ बुधवार को ऋषिकेश के मायाकुंड स्थित तारा माता मंदिर में आठवीं छड़ी यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के बीच संत-महात्माओं का स्वागत किया गया। इसके बाद धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन के साथ छड़ी यात्रा को विभिन्न तीर्थस्थलों के लिए रवाना किया गया। यात्रा का नेतृत्व महामंडलेश्वर हिमालय योगी श्री 108 वीरेंद्रानंद गिरी महाराज कर रहे हैं।श्री बद्रीश श्री विभूषित हिमालय पीठाधीश्वर एवं उत्तराखंड राजगुरु ब्रह्मलीन गोदावरी गिरी जी महाराज के समाधि स्थल से प्रारंभ हुई इस यात्रा में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। तारा माता मंदिर में महंत संध्या गिरी जी महाराज ने संतों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया। इसके बाद यात्रा ने ऋषिकेश के दत्तात्रेय घाट पर , त्रिवेणी घाट की परिक्रमा करते हुए विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया गया।इस अवसर पर महंत संध्या गिरी जी महाराज ने कहा कि आठवीं छड़ी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक विरासत, संत परंपरा और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण अभियान है। प्रदेश के अनेक प्राचीन मठ-मंदिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन उनकी महत्ता से आज भी बड़ी संख्या में लोग परिचित नहीं हैं। ऐसे धार्मिक स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना और नई पीढ़ी को उनके इतिहास एवं धार्मिक महत्व से अवगत कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि छड़ी यात्रा के माध्यम से हिंदू धर्म के प्रति जन-जागृति लाने, धार्मिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार करने और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा के दौरान संत-महात्मा विभिन्न तीर्थस्थलों पर दर्शन-पूजन कर सनातन धर्म और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का संदेश देंगे।
आठवीं छड़ी यात्रा उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित अनेक प्रमुख एवं प्राचीन मंदिरों तक पहुंचेगी। निर्धारित यात्रा मार्ग में बड़कोट, लाखामंडल, जागेश्वर धाम, बागेश्वर, पूर्णागिरि, आदि कैलाश, बिनसर महादेव, कसार देवी, नैना देवी, ओम पर्वत, कटारमल सूर्य मंदिर और नंदा देवी सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल शामिल हैं।इन तीर्थस्थलों पर पहुंचकर संत-महात्मा पूजा-अर्चना करेंगे और उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संदेश प्रसारित करेंगे। यात्रा का उद्देश्य केवल प्रसिद्ध धामों तक पहुंचना ही नहीं, बल्कि उन प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों को भी व्यापक पहचान दिलाना है, जो प्रदेश की आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। विभिन्न तीर्थस्थलों की यात्रा पूरी करने के बाद छड़ी यात्रा मायापुरी, हरिद्वार में संपन्न होगी।
छड़ी यात्रा के शुभारंभ अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े महंत हरि गिरी महाराज, वर्तमान सभापति मोहन भारती, महामंत्री श्री महेश पुरी, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरी, सचिव श्री महंत कंचन गिरी, श्रीमहंत महाकाल गिरी, महेंद्र, पशु गिरी, पशुपति गिरी, शिवानंद सरस्वती, महंत मनोहर पुरी, खुशी गिरी, मन्नू बाबा, नीलगिरी, दयानंद गिरी, ऋषिकेश गिरी, शिवानंद गिरी, लक्ष्मी गिरी, गौतम गिरी और राधा गिरी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।इसके अलावा जनसंपर्क अधिकारी गंभीर सिंह मेवाड़, संजय शास्त्री, मुकेश घड़ियाल, सचिन त्यागी, रितिका कपूर, महेश पाल, भरत, पीहू रानी, सरस्वती गिरी और पुजारी सचिन लेखवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने संतों का स्वागत किया और यात्रा के शुभारंभ में सहभागिता की।
धार्मिक उत्साह और सनातन संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ शुरू हुई आठवीं छड़ी यात्रा को लेकर संतों एवं श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के माध्यम से उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थों के साथ-साथ प्राचीन मठ-मंदिरों की महत्ता को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।





