UK : पेड़ों का कटान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं, विकास और पर्यावरण में बने संतुलन

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  • टेड़ी मेड़ी सडक इस रूट की खूबसूरती है..पता नहीं इसको छेड़ने की क्या जरुरत पड़ी सरकार को?
  • जहाँ विकास करना होता है वहां नहीं करेंगे, जहाँ नहीं करना होता है वहां करेंगे : पर्यावरणविद 
  • भानिवायाला,एअरपोर्ट से ऋषिकेश तक आती है सड़क, लोग घूमने आते हैं इस सड़क पर 
  • सरकार के विकास कार्य  मतलब हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश तक सीमित क्योँ ? पहाड़ी जनपदों में जाए 
  • पेड़ नहीं  काटे …यही पर्यावरणविद मांग कर रहे हैं 
ऋषिकेश : भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन मोटर मार्ग के निर्माण के लिए प्रस्तावित 3000  से अधिक पेड़ों के कटान का विरोध तेज होने लगा है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग लगातार इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन इसके लिए हजारों पेड़ों की बलि देना भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।गुरुवार को कई पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए साथ मोड़ के पास वहां पर उन्हूने सांकेतिक विरोध किया. हैरानी जताई ऐसी क्या जरुरत पड़ी जो इस कदर से पेड़ काटे जा रहे हैं और सड़क का स्वरुप बदला जा रहा है. जबकि जो वर्तमान में सड़क है वह खुबसूरत है और यही खूबसूरती इस रूट की USP भी है. 
सामाजिक कार्नेयकर्त्ता आशुतोष कोठारी का कहना है, विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों का कटान किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। उत्तराखंड पहले ही जलवायु परिवर्तन, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में हजारों पेड़ों को काटना पर्यावरणीय संतुलन को और अधिक प्रभावित करेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को सड़क निर्माण के ऐसे विकल्प तलाशने चाहिए, जिनमें कम से कम पेड़ों का नुकसान हो। यदि पेड़ों का कटान अपरिहार्य हो भी, तो उसके बदले केवल पौधारोपण की औपचारिकता नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।कोठारी  ने कहा कि पर्यावरण प्रेमी इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएंगे और सरकार से विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलित नीति अपनाने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि पेड़ों का कटान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।सरकार समझ से परे है इस सड़क को क्योँ छेड़ रही है? जबकि पहाड़ों में विकास के कार्य बहुत हैं वहां करे…मगर पेड़ न काटे  या जहाँ बहुत जरूरी हो वहां काटे…लेकिन उनकी जगह पर पेड़ लगाये भी.

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