संतों, हिन्दू संगठनों के विरोध के बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्य “रामचरित्र मानस” पर अपने विवादित बयान को लेकर आज भी कायम

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दीपांकुश चित्रांश की रिपोर्ट-

खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से है सुल्तानपुर पहुँचे पूर्व कैबिनेट मंत्री व समाजवादी पार्टी के MLC स्वामी प्रसाद मौर्या ने बताया कि वो ‘राम चरित्र मानस’ पर अपने विवादित बयान को लेकर आज भी कायम हैं।

वाराणसी से लखनऊ वापस लौटते समय सुल्तानपुर में उन्होंने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा हमने राम चरित्र मानस पर कोई टिप्पणी नहीं की है उसके चौपाईयों के वो अंश जिससे देश की सभी महिलाएं खास बात यह कि दलित और पिछड़ों को अपमानित होना पड़ता है। उस पर मैं अडिग भी हूं।समाजवादी पार्टी (सपा) एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे कहा, कहीं नीच और कहीं अधर्म कहकर के उनको समाज में नीचा दिखाया जाता है। ऐसे ही शब्दों को संशोधित करने की मैने मांग की है। जब तक देश की महिलाओं,दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों को सम्मान नहीं मिलेगा यह आवाज उठती रहेगी और यह अभियान चलता रहेगा। स्वाभाविक रूप से मैने राष्ट्रपति को और प्रधानमंत्री को तुलसीदास के चौपाइयों के वह अंश जहां-जहां महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के लिये अपमानजनक टिप्पणीयां की गई है उन सबको इंगित करते हुए उस पत्र को मैने भेजा है।राम चरित मानस से ऐसे अंश को संशोधित कराया जाएं, यह मेरी मांग है और उस पर मैं अडिग भी हूं। अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सरकार महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों सम्मान दिलाने के परिधर हैं या अपमान करने वालों के साथ खड़ी है। इससे तय हो जायेगा क्योंकि यह कोई ग़ैर नहीं है। जिसका नाम मैने इंगित किया है नाम यह सभी हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग है। कोई ऐसा धर्म नहीं है जो अपने ही धर्म को नीच कहता हो, अधर्म कहता हो और गाली देता हो।किसी भी धर्म को, किसी भी वर्ग-जाति, समाज को गाली देने का अधिकार नहीं है।

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संतों, हिन्दू संगठों ने किया है विरोध-
मौर्या के बयान के बाद संतों ने उनका घोर विरोध किया है. कार्रवाई की मांग की है. साथ ही हिन्दू संगठनों ने विरोध जताया है. कई जगहों पर अभी भी विरोध जारी है. ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला स्थित महामंडलेश्वर स्वामी विष्णुदास जी महाराज जो धर्मराज मंदिर अध्यक्ष भी हैं उन्होंने मांग की है स्वंय प्रसाद मौर्या को फांसी की सजा होनी चाहिए. 

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