रूड़की : रमजान के तीसरे जुमे की नमाज की गई अकीदत के साथ अदा, रोजे में खुद को भूखे रहकर दूसरे की भूख और दुख दर्द का होता है एहसास

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रूड़की :देश की तरक्की,अमन,खुशहाली के साथ ही कौम की उन्नति की दुआ की गई।नगर के मुख्य जामा मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने जुमा की नमाज अदा कराई।नमाज अदा करने से पहले मदरसा रहमानिया के मौलाना अजहरूल हक ने तकरीर में रमजान की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि रमजान में दुनिया भर के मुसलमान पूरे महीने का रोजा रखते हैं।

रोजा इस्लाम धर्म की पांच प्रमुख फर्जों तौहीद,नमाज,रोजा जकात और हज में से एक है,जो हर एक बालिक मुसलमान मर्द-औरत पर फर्ज है।इस महीने में दुनियाभर के मुसलमान सिर्फ इसलिए रोजा रखते हैं कि इसका हुक्म उनके धर्म में दिया गया है,लेकिन आधुनिक साइंस के नजरिए से किए जा रहे रिचर्स और अध्ययन से रोजे के कई सामाजिक,आर्थिक,स्वास्थ्य एवं वैज्ञानिक फायदे भी बताए गए हैं।रोजा सिर्फ इबादत और अल्लाह को खुश करने का तरीका भर नहीं है,बल्कि यह इंसान को सही मायने में इंसानियत के ढांचे में डालता है।रोजा एक दूसरे के दुख दर्द को समझने तथा मदद करने के लिए प्रेरित करता है।मुसलमानों को रोजा रखकर भूख की शिद्दत को समझने का मौका दिया गया है,ताकि यह महसूस करें कि जो गरीब इंसान है और जिनके पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं है उनका दुख दर्द कैसा होता है।

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इसके बाद मुसलमानों को यह हुक्म दिया गया है कि यदि इस महीने में अपने माल का जकात का गरीबों में कुछ हिस्सा बांटा जाए तो उसका सवाब अल्लाह ताला सत्तर गुना बढ़ा देते हैं।कारी शमीम अहमद,मौलाना नसीम अहमद कासमी,कारी एहतसाम तथा मौलाना अरशद कासमी ने कहा कि मुसलमानों को यह हुक्म दिया गया है कि यदि इस महीने में अपने माल की जकात गरीबों में दोगे तो गरीब का भी पेट भर जाएगा और वह भूखा नहीं रहेगा।उन्होंने रमजान के आखिरी यानी तीसरे असरा की फजीलत बयान करते हुए कहा कि इन आखिर के दस दिनों में खूब तिलावते कलाम पाक करनी चाहिए तथा दुआ ए मगफिरत करनी चाहिए।

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इस दौरान हाजी फुरकान अहमद विधायक,हाजी नौशाद अहमद,डा.नैयर काजमी,अफजल मंगलौरी,हाजी सलीम खान,जावेद अख्तर एडवोकेट,हाजी लुकमान कुरैशी,शेख अहमद जमा,अलीम सिद्दीकी,मोहम्मद अय्यूब,यासीन माहीगिर,सैयद नफीस,हाजी महबूब कुरैशी,सलीम साबरी,हाजी गुलफाम अहमद,इमरान देशभक्त, मोहम्मद मुसव्विर,कलीम खान, डॉक्टर मोहम्मद मतीन,जाकिर त्यागी,मोहम्मद जुल्फान आदि बड़ी संख्या में लोगों ने जुमे की नमाज अदा की।

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