ऋषिकेश :आगामी आल इंडिया मेयर काउंसिल का आयोजन, बोर्ड फंड से करने पर निगम पार्षदों का तीखा विरोध

ADVERTISEMENTS Ad
ख़बर शेयर करें -
  • पार्षदों का साफ़ साफ़ कहना था, सड़कें, नालियां तो बन नहीं रही प्रॉपर, ऐसे काम केलिए फण्ड कहाँ से आएगा ?
  • फिर बोर्ड के फंड को प्रयोग में लाने का विरोध किया पार्षदों ने, साफ़ कहना था, अपना घर तो देख लो पहले फिर मेहमानों को बुलाना 

ऋषिकेश : आल इंडिया मेयर काउंसिल होने जा रही है. अभी तारिख निश्चित नहीं हुई है.  इसके  आयोजन को लेकर बुलाई गई निगम पार्षदों की बैठक हंगामेदार रही।सोमवार को  मेयर काउंसिल की तैयारी में होने वाले व्यय को बोर्ड फंड से कराने पर निगम अधिकारियों को पार्षदों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। इस बाबत निगम पार्षदों के सवालों के जवाब पर अधिकारी बगले झांकते नजर आए।

 राज्य आंदोलनकारी सभागार ऋषिकेश में आल इंडिया मेयर काउंसिल की बैठक को लेकर ऋषिकेश नगर निगम की बोर्ड बैठक आयोजित हुई। बैठक में ऋषिकेश मेयर द्वारा पेश पहले प्रस्ताव की रूप रेखा को देख निगम पार्षदों का पारा  सातवें आसमान पर चढ़ गया।  प्रस्ताव को देख पार्षद दो गुटों में बंट गया। प्रस्ताव को आम सहमति दिलाने में निगम  अधिकारियों को खासे पापड़ बेलने पड़ गए। पार्षदों का आरोप था कि आल इंडिया मेयर काउंसिल की बैठक आयोजित करने में व्यवस्थाओं में  व्यय लाखों रुपए बोर्ड का व्यय हो जाएगा। उनका आरोप था कि निगम पार्षद जब अपने वार्डो के विकास के प्रस्ताव निगम को देते है तो  निगम अधिकारी बजट का रोना रोकर अधिकांश प्रस्ताव निरस्त कर देते है। ऐसे  में विकास कार्य नहीं करा पाने से उन्हें क्षेत्र के नागरिकों के गुस्से का सामना कर आ पड़ता है। उनका आरोप था कि एक ओर निगम पार्षदों के लिए बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है, तो दूसरी ओर निगम आल इंडिया मेयर काउंसिल की बैठक में बोर्ड बजट का दुरुपयोग  कर  झूठी वाह वाही लूटने का प्रयास कर रहा है। उनकी मांग थी कि निगम मेयर काउंसिल के आयोजन की व्यवस्था को राज्य सरकार के बजट से करने का प्रयास करे, न की बोर्ड के बजट से। क्योंकि क्षेत्र में अभी विकास जैसे सड़क, नालिया,पार्क निर्माण, सिवरेज कार्य, सार्वजनिक शौचालय निर्माण,उनकी साफ सफाई, पथ प्रकाश आदि कार्य  किए जाने बाकी है। जिसका उन्हें क्षेत्र के लोगों को जवाब देना होता है।
काफी  माथा पच्चीसी व विचार विमर्श के बाद पार्षदों की सहमति के उपरांत अधिकतम बीस लाख रुपए तक खर्च किए जाने पर सहमति बनी। शेष धनराशि अन्य सोर्स से जुटाए जाने के उपरांत प्रस्ताव पर सहमति बनी। इसके अलावा कोयल घाटी चौक को पौराणिक ऋषि मुनि के नाम पर किए जाने का प्रस्ताव दिया गए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पार्षदों के समर्थन देने का अनुरोध किया गया। निगम के सीमानतर्गत नव निर्मित क्षेत्रों से प्रापर्टी  टैक्स वसूलने के प्रस्ताव पर पार्षदों की सहमति बनी। निगम के आउटसोर्स कार्मिकों के वेतन वृद्धि श्रम विभाग के नए शासनादेश के आधार पर किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। पर्यावरण मित्रों के वेतन वृद्धि का प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। तो वहीं निगम पार्षदों का मासिक मानदेय दिए जाने के प्रस्ताव का  सभी पार्षदों ने समर्थन किया तो वही जनसेवा का हवाला देकर केवल दो पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट व लव कंबोज ने मानदेय लिए जाने विरोध किया। इसके अलावा नगर निगम के  नियमित संविदा, समिति अथवा आउटसोर्स कर्मचारियों के शासकीय कार्य के दौरान चोटिल , घायल होने पर तत्काल उपचार के लिए न्यूनतम दस हजार रुपए धनराशि जारी करने, उपचार के दौरान वेतन नहीं काटने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। बैठक में कुल 21 प्रस्ताव में आधे से ज्यादा  प्रस्ताव में निगम पार्षदों का सबसे ज्यादा रोष देखने को मिला। निगम की बोर्ड बैठक में निगम मेयर शंभू पासवान ,नगर आयुक्त राम गोपाल बिनवाल,शायक नगर आयुक्त चंद्र कांत भट्ट,निगम पार्षद देवेंद्र प्रजापति। सत्या कपरूवान, सुरेंद्र नेगी, लव कंबोज, चेतन चौहान, सतवीर भंडारी राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, वीरेंद्र रमोला, मुस्कान , किरण यादव, पिंकी यादव, माधवी गुप्ता रीना, सरोजनी थपलियाल आदि उपस्थित थे।
ALSO READ:  UK: आसान सांस लेना: विश्व अस्थमा दिवस के लिए अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है अस्थमा से ग्रसित मरीजों के लिए AIIMS विशेषज्ञों की राय

Related Articles

हिन्दी English