ऋषिकेश : योगाचार्यों की उठाई आवाज डॉ राजे सिंह नेगी ने, बोले सुध ले इनकी सरकार

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ऋषिकेश- योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी में भी योग योगाचार्य बेरोजगारी का दंश झेलने को विवश हैं।कोरोनाकाल निपटने के बाद भले ही उत्तराखंड में दो वर्ष के लंबे इंतजार के बाद पर्यटन और तीर्थाटन की गाड़ी पटरी पर लौट आई है लेकिन भारतीय प्राचीनतम योग विधा के प्रशिक्षक अभी भी तंगहाली के दौर से ही गुजरने को विवश हैं।

इस गंभीर मसले पर अंतरराष्ट्रीय गढवाल महासभा के अध्यक्ष व पौड़ी योग एशोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजे नेगी ने आवाज बुंलद करते हुए कहा कि 21 जून को 8 वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाये जाने की तैयारियाँ बड़े जोर शोर से चल रही है यहां तक कि आयुष विभाग ने जगह जगह योग कार्यक्रम चलाने के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त कर दिये हैं परंतु उत्तराखंड के साठ हजार से अधिक योग प्रशिक्षित योग मे रोजगार की बाट (इन्तजार) जोह रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग प्रशिक्षित विगत डेढ़ दशक से योग को विद्यालयी शिक्षा में अनिवार्य विषय बनाने व योग शिक्षक नियुक्त करने को लेकर राज्य के मुखियाओं से मुलाकात कर चुके हैं। परंतु उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला चाहे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार रही हो या वर्तमान की भाजपा सरकार सभी ने योग को अपनी राजनीति चमकाने का साधन बना कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि विश्व योग दिवस के दिन विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री योगासन लगाते व योग की महिमा का बखान करते हुए दिखेंगे।

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जिसके बाद सोशल मीडिया और अगली सुबह प्रिंट मीडिया पर उनके योग करते हुए फोटो से पूरा अखबार पटा पडा हुआ होगा परंतु योग मे रोजगार के लिए उन्होंने आजतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विश्व पटल पर योग की राजधानी ऋषिकेश कहे जाने के बावजूद भी राज्य सरकार की तरफ से आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव कार्यक्रम भी टिहरी और पौड़ी जनपद में कराए जाते है।जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है।आपको बता दें ऋषिकेश देहरादून जिले में पड़ता है. जहाँ योग महोत्सव होता है वह टिहरी जिला और परमार्थ पौड़ी जिले पड़ता है. 

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