UK: स्वर्गाश्रम में  विवाद पहुंचा झगड़े तक, हालात बिगड़ने से पहले शांति भंग करने पर हुई 5 की गिरफ्तारी

ADVERTISEMENTS Ad
ख़बर शेयर करें -
  • शांति भंग कर अराजकता फैलाने की कोशिश, पुलिस ने त्वरित कार्यवाही कर संभाला मोर्चा
नाम पता गिरफ्तार व्यक्ति
1. माधव अग्रवाल, निवासी- स्वर्गाश्रम रामझूला पौड़ी गढ़वाल 
2. राजेश सिंह, निवासी- जौंक रामझूला पौड़ी गढ़वाल।
3. अनीश कृष्ण बिष्ट, निवासी-स्वर्गाश्रम जौंक लक्ष्मणझूला
4. किशन राजपूत, निवासी- स्वर्गाश्रम रामझूला 
5. अमन जुगरान, निवासी- गुमानीवाला ऋषिकेश
ऋषिकेश : थाना लक्ष्मणझूला क्षेत्रान्तर्गत दो पक्षों के बीच हुआ आपसी विवाद देखते ही देखते झगड़े में बदल गया. जिससे क्षेत्र में अशांति का माहौल उत्पन्न हो गया. घटना की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस टीम पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों को समझाने एवं शांत कराने का प्रयास किया. पुलिस द्वारा समझाने के बावजूद भी एक पक्ष द्वारा लगातार शांति व्यवस्था भंग किए जाने पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए संबंधित 05 व्यक्तियों (माधव, राजेश सिंह, अनीश, किशन व अमन) को 170 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार किया गया है. प्रारंभिक जानकारी में यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपसी बहसबाजी, आरोप-प्रत्यारोप एवं विवादित टिप्पणियां की जाती रही हैं. इसी क्रम में दिनांक 10.05.2026 को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके चलते विवाद ने झगड़े का रूप ले लिया था. 
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 170 (Section 170) संज्ञेय अपराधों (Cognizable Offences) को रोकने के लिए पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करती है। यह धारा बताती है कि यदि किसी पुलिस अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध की योजना की जानकारी हो, तो वह अपराध रोकने के लिए ऐसा कर सकता है
BNSS धारा 170 के मुख्य बिंदु:
  • उद्देश्य: यह धारा अपराध होने से पहले ही उसे रोकने के लिए “निवारक गिरफ्तारी” (Preventive Arrest) का प्रावधान करती है
  • बिना वारंट गिरफ्तारी: पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश और बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है, यदि उसे विश्वास हो कि अपराध को अन्यथा नहीं रोका जा सकता
  • परिस्थिति: यदि कोई व्यक्ति कोई संज्ञेय अपराध (जैसे- चोरी, डकैती) करने की योजना बना रहा हो, तो यह धारा लागू होती है
  • सीमित शक्ति: यह धारा कार्यपालक मजिस्ट्रेट को केवल सीमित रोकथाम का अधिकार देती है और इसका उपयोग दंडात्मक हिरासत के रूप में नहीं किया जा सकता हैअक्सर 126/135 के साथ उपयोग:सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने, दंगा भड़काने या शांति भंग करने (126/135 बीएनएसएस) जैसी स्थितियों में भी 170 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की जाती है

Related Articles

हिन्दी English