UK : हल्द्वानी के गौलापार में शिफ्ट होगा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अब नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार में होगा हाईकोर्ट शिफ्ट

- नैनीताल हाईकोर्ट के शिफ्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई
- SC ने कहा अगले छह हफ्ते में हाईकोर्ट प्रस्तावित भूमि को अपने कब्जे में ले और आगे की की प्रक्रिया शुरू करे
- राज्य सरकार से मिलकर शिफ्टिंग मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी करे
-
न्यायिक स्तर पर इस तरह के जनमत संग्रह के आदेश पारित करना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है: सुप्रीम कोर्ट
- आपको बता दें, हल्द्वानी नैनीताल जिले में पड़ता है, हाई कोर्ट शिफ्ट होने की प्रक्रिया अब जल्द पूरी होगी

नैनताल हाईकोर्ट
नई दिल्ली/नैनीताल: हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट के बड़ा और अहम फैसला सुनाया है. सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के 4 मई 2024 के आदेश को पूरी तरह से रद्द (सेट असाइड) कर दिया है. जिसमें हाईकोर्ट शिफ्टिंग करने के लिए एक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की बात कही गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक स्तर पर इस तरह के जनमत संग्रह के आदेश पारित करना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रुख पर कड़ी असहमति जताई. उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट का न्यायिक पक्ष पर इस तरह के आदेश पारित करने से कोई सरोकार या लेना-देना नहीं होना चाहिए. अदालत का काम जनमत संग्रह कराना नहीं है.
उल्लेखनीय है, नैनीताल से हाईकोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार में शिफ्टिंग की प्रक्रिया चल रही थी. जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को खारिज करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और स्थान परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने का एक तय प्रशासनिक तरीका होता है. यह आदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने जारी किया था. हाईकोर्ट ने तब हल्द्वानी के गौलापार में चिह्नित की गई भूमि को हाईकोर्ट के लिए अनुपयुक्त ठहराया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस जटिल मामले का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए निर्देश दिया है कि अब इस पूरे विवाद को प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जाए. न्यायालय ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट को अपने प्रशासनिक पक्ष पर राज्य सरकार के साथ आपसी समन्वय और परामर्श करना चाहिए. हाईकोर्ट एवं राज्य सरकार मिलकर बैठें और अदालत परिसर से जुड़े सभी ढांचागत (इन्फ्रास्ट्रक्चरल) मुद्दों व समस्याओं का एक ठोस समाधान तैयार करें.




