UK :रायवाला में पंचम श्रीरामलीला महोत्सव में सुग्रीव दरबार, श्रीराम-हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता, बाली वध एवं सीता माता की खोज का हुआ भव्य मंचन

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- बाली वध का मंचन हमें धर्म, न्याय, मर्यादा और अहंकार के परिणामों का संदेश देता है
- भगवान श्रीराम ने किया बाली वध, अधर्म के विरुद्ध दिया नारी सम्मान और मर्यादा का संदेश

प्रतीतनगर (रायवाला) : प्राथमिक विद्यालय, श्रीरामलीला चौक, वार्ड नंबर 06, प्रतीतनगर गांव रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्रीरामलीला महोत्सव में शुक्रवार को पांच प्रमुख प्रसंगों का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। इनमें सुग्रीव दरबार, श्रीराम-हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता, बाली वध तथा सीता माता की खोज के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला में भगवान श्रीराम द्वारा बाली वध के प्रसंग के माध्यम से नारी सम्मान, सामाजिक मर्यादा और अधर्म के विनाश का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। मंचन के माध्यम से बताया गया कि पराई स्त्री को माता के समान सम्मान देना चाहिए। किसी भी स्त्री, बहन, पुत्रवधू अथवा कन्या के प्रति कभी भी बुरी दृष्टि नहीं रखनी चाहिए।
श्रीराम-हनुमान मिलन ने दर्शकों को किया भावुक-
श्रीरामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि शुक्रवार की लीला में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वन-वन भटकते हुए ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। दोनों भाइयों को देखकर सुग्रीव के मन में आशंका उत्पन्न हुई। उनकी वास्तविकता जानने के लिए सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा।हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचे। बातचीत के दौरान प्रभु श्रीराम ने अपना परिचय दिया और वन में विचरण करने का उद्देश्य बताया। प्रभु श्रीराम को पहचानते ही हनुमान जी भावविभोर हो गए और उनके चरणों में गिर पड़े। इस भावुक प्रसंग ने दर्शकों को भी भावुक कर दिया। पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गूंज उठा।इसके पश्चात हनुमान जी ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट कराई। दोनों के बीच मित्रता हुई और सुग्रीव ने भगवान श्रीराम को अपनी व्यथा सुनाई।
बाली वध के मंचन से दिया मर्यादा और न्याय का संदेश
इसके बाद रामलीला मंच पर वानरराज बाली के दरबार का दृश्य प्रस्तुत किया गया। सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों भाइयों के बीच गदा युद्ध एवं मल्लयुद्ध हुआ। इसी दौरान भगवान श्रीराम ने अपने धनुष से बाली का वध कर दिया।मृत्यु के समय बाली ने भगवान श्रीराम से कहा कि सुग्रीव आपकी क्या सहायता कर पाएगा? यदि आप मुझे बताते तो मैं रावण को भी परास्त कर सकता था, जिसे मैंने छह माह तक अपनी कैद में रखा था। इस प्रकार बाली वध का प्रसंग संपन्न हुआ।
संपाती ने बताया माता सीता का पता, जामवंत ने कराया हनुमान जी को शक्ति का स्मरण
अगले दृश्य में माता सीता की खोज में निकले वानर एवं भालू दल का मंचन किया गया। खोज करते-करते सभी थककर समुद्र तट पर पहुंच गए। विशाल समुद्र को देखकर वे निराश हो गए। इसी दौरान उनकी भेंट संपाती नामक गिद्ध से हुई। संपाती ने बताया कि रावण माता सीता का हरण कर उन्हें अपनी नगरी लंका ले गया है। यह समाचार सुनते ही वानर दल में उत्साह और नई आशा का संचार हुआ, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती विशाल समुद्र पार कर लंका पहुंचने की थी।जब सभी वानर और भालू समुद्र पार करने को लेकर असमंजस में थे, तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी असीम शक्तियों का स्मरण कराया और कहा—
“पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।।”
जामवंत के प्रेरणादायक वचनों को सुनकर हनुमान जी को अपनी शक्ति का स्मरण हुआ। उन्होंने विशाल रूप धारण कर सिंहनाद किया और कहा कि इस विशाल खारे समुद्र को वे खेल-खेल में पार कर सकते हैं। इस रोमांचक दृश्य ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया। पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ एवं ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से गूंज उठा।विरेन्द्र नौटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री रामलीला महोत्सव के निर्देशक मंच की आत्मा होता है।मंच पर कलाकारों का अभिनय दिखता है, लेकिन उसके पीछे निर्देशक की महीनों की तपस्या, सोच और मार्गदर्शन होता है। जो कलाकार निर्देशक के भावों को समझकर आत्मसात कर लेता है, वही अपने पात्र को जीवंत कर पाता है।रामलीला महोत्सव के मुख्य निर्देशक महेंद्र सिंह राणा जी को उनकी साधना, समर्पण और कुशल निर्देशन के लिए हृदय से नमन। कलाकार मंच पर प्रस्तुति देता है, लेकिन उस प्रस्तुति की आत्मा निर्देशक होता है।
अतिथियों एवं कीर्तन मंडलियों को समिति ने किया सम्मानित
इस अवसर पर लोक कल्याण समिति की ओर से गढ़वाल महासभा रायवाला के प्रतिनिधि, श्री रामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी ऋषिकेश के कलाकार मयंक शर्मा हनुमान जी, परशुराम जी के पात्र, अंकुश मौर्य भरत जी के पात्र,विनायक कुमार लक्ष्मण जी, श्रवण कुमार के पात्र, भारतेन्दु शंकर पाण्डेय एक रामलीला में श्रीराम, एक में रावण के पात्र एवं अनुज पोखरियाल जी को परिवार सहित सम्मानित किया गया ।
इस अवसर पर लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी, प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू), मुख्य एवं वरिष्ठ निर्देशक महेंद्र सिंह राणा, ग्राम प्रधान राजेश जुगलान सदस्य नवीन चमोली, अंजु बड़ोला एवं राजेन्द्र प्रसाद तिवाड़ी, सुनील तिवाड़ी, सूरज चमोली, नवीन चमोली, आशीष उनियाल, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।






