UK : अवधूत परमहंस स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड योगा कम्युनिटी से संबद्ध एक वर्चुअल सभा को संबोधित किया

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ऋषिकेश :  30 जून 2026 को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत स्वामी समर्पण आश्रम, तपोवन, ऋषिकेश के अध्यक्ष अवधूत परमहंस स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड योगा कम्युनिटी से संबद्ध एक वर्चुअल सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर उनके साथ भारत से उनकी शिष्या योगिनी अनामिका राजपूत सिंह तथा अमेरिका से शेली ग्रांडे भी उपस्थित रहीं, जिससे इस आयोजन की वैश्विक भावना और अधिक सुदृढ़ हुई।
अपने संबोधन में स्वामीजी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और चेतना के समन्वय का एक समग्र विज्ञान है, जो मनुष्य के व्यक्तित्व के संतुलित एवं सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि योग एक सार्वभौमिक विज्ञान है, जो धर्म, जाति, राष्ट्रीयता, भाषा और संस्कृति की सीमाओं से परे संपूर्ण मानवता के लिए समान रूप से उपयोगी है। योग स्वस्थ शरीर, शांत एवं एकाग्र मन, भावनात्मक संतुलन तथा आध्यात्मिक जागरण का प्रभावी माध्यम है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को तनाव, चिंता और आंतरिक अशांति से मुक्त कर आत्मानुशासन, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति की ओर अग्रसर करता है।
स्वामीजी ने कहा कि आज के तनावपूर्ण और तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में योग मानव समाज के लिए शांति, करुणा, सद्भाव और समग्र कल्याण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन से होती है। जब व्यक्ति योग के माध्यम से अपने भीतर संतुलन, करुणा, आत्मसंयम और जागरूकता का विकास करता है, तब वही सकारात्मक परिवर्तन परिवार, समाज और राष्ट्रों के बीच विश्वास, सहयोग और सौहार्द का आधार बनता है। इस प्रकार योग केवल व्यक्तिगत परिवर्तन का साधन नहीं, बल्कि वैश्विक एकता और स्थायी विश्व शांति की स्थापना का प्रभावी मार्ग भी है।
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अभूतपूर्व समर्थन के साथ स्वीकार किया, जिसके परिणामस्वरूप 21 जून 2015 को प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्वभर में मनाया गया। तब से योग स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सांस्कृतिक समन्वय और वैश्विक बंधुत्व के संदेश को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने वाला एक जनआंदोलन बन चुका है।
कार्यक्रम का समापन “पूर्णमदः पूर्णमिदम्” मंत्र के उच्चारण तथा “लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु” के मंगलाशीर्वचन के साथ हुआ। स्वामीजी ने सभी के स्वस्थ, सुखी, शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन की कामना करते हुए कहा कि यदि योग के मूल सिद्धांत—शांति, आत्मसंयम, करुणा, संतुलन और सार्वभौमिक बंधुत्व—को व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में अपनाया जाए, तो एक स्वस्थ, समरस, शांतिपूर्ण और अधिक एकजुट विश्व का निर्माण संभव है।
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