UK : योग, प्राणायाम एवं होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर में 22 मरीजों ने लिया स्वास्थ्य लाभ

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ऋषिकेश : तपोवन स्थित स्वामी समर्पर्नानंद आश्रम में  स्वास्थ्य श्हिविर आयोजित किया गया था.  आयोजित शिविर में  योग, प्राणायाम एवं होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर में गुरुदेव स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीजों को योग एवं प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी तथा उद्गीत प्राणायाम का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए इनके नियमित अभ्यास के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर योगिनी देवीप्रियांनंद सरस्वती एवं योगाचार्य कपिल देव ने प्रतिभागियों को योग एवं प्राणायाम की सही विधि का प्रशिक्षण दिया तथा अभ्यास के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। शिविर में अनेक स्वयंसेवकों ने अपनी सेवाएं देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।शिविर में डॉ. प्रदीप पैन्युल एवं चंद्र किशोर ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं होम्योपैथिक उपचार प्रदान किया। सभी मरीजों को निःशुल्क होम्योपैथिक औषधियों का वितरण भी किया गया।इसके अतिरिक्त, शिविर के दौरान घायल एवं चोटिल मरीजों को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) उपलब्ध कराया गया। चिकित्सा टीम द्वारा आवश्यकतानुसार घावों की ड्रेसिंग कर औषधीय मलहम लगाया गया तथा पट्टी (बैंडेज) की गई। साथ ही मरीजों को घावों की देखभाल, संक्रमण से बचाव एवं आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियों के संबंध में परामर्श भी प्रदान किया गया।इस स्वास्थ्य शिविर में कुल 22 मरीजों ने भाग लिया और योग, प्राणायाम, होम्योपैथिक चिकित्सा तथा प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।
प्राणायाम का महत्व-
प्राणायाम योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, तनाव प्रबंधन तथा संपूर्ण स्वास्थ्य के संतुलन में भी सहायक माना जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित होता है तथा आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ जैसे त्रिदोषों के संतुलन में भी सहायता मिल सकती है।
प्राणायाम के सामान्य लाभ-
मन को शांत एवं स्थिर रखने में सहायता।
तनाव और चिंता में कमी।
एकाग्रता एवं मानसिक सजगता में सुधार।
फेफड़ों की क्षमता और श्वसन क्रिया में सुधार।
बेहतर नींद एवं समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा।
आवश्यक सावधानियां
प्राणायाम हमेशा खाली पेट अथवा हल्का भोजन करने के कुछ समय बाद करें।
अभ्यास के दौरान चक्कर, घबराहट या किसी प्रकार की असुविधा होने पर तुरंत अभ्यास रोक दें।
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति किसी योग्य चिकित्सक अथवा प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही प्राणायाम का अभ्यास करें।

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