जिनको संगीत सीखने की तमन्ना होती है…उनके रास्ते में विद्यालय की कमी आड़े हाथ नहीं आती : पद्मश्री अनुराधा पौडवाल

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दीपांकुश चित्रांश की रिपोर्ट-

खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से है जहाँ सुल्तानपुर पहुंची पद्मश्री से सम्मानित अनुराधा पौडवाल ने कहा संगीत भारत की शान रहा है।जिस देश में मैं पैदा हुई हूं वहां संगीत का बहुत ही मान है। संगीत कपड़े की मिल नहीं है । यह तो भाव प्रधान विषय है। यह प्रैक्टिकल वे में संभव नहीं है कि बहुत एल्बम एक साथ आएं। आज की बेटियों को जब मैं देखती हूं तो उनकी संगीत के प्रति लगन और साधना को देखकर अच्छा लगता है। सरकार भी संगीत को बढ़ावा देने की दिशा में अच्छा काम कर रही है। 50 साल पहले तो ऐसा नहीं था। जिन्हें संगीत सीखने की तमन्ना होती है। उनके रास्ते में विद्यालय की कमी आड़े हाथ नहीं आती । वह कैसे भी संगीत की दिशा में आगे बढ़ते चले जाते हैं। संगीत के ट्रेडिशनल रुप को आगे बढ़ाते जाइए।उन्होंने कहा कि 50 साल पहले संगीन को यह मुकाम हासिल नहीं था,जो आज है। उन्होंने युवा पीढ़ी से संगीत की दिशा में और साधना से आगे बढ़ने का आह्वान किया है।

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पद्मश्री से सम्मानित भजन साम्राजी अनुराधा पौडवाल ने आज के युवाओं से साधना संगीत में और सुधार का आवाहन किया है। शहर के शेमफोर्ट विद्यालय की तरफ से आयोजित देवी भगवती जागरण में वो शिरकत करने सुलतानपुर पहुँचीं थीं। जहां पर उन्होंने भगवान शिव समेत सुविख्यात अपने भजन को दोहराया और लोगों को भाव विभोर कर दिया।

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