ऋषिकेश : नवजात की मौत का मामला,एम्स ने कहा न्यूनोटोलॉजी वार्ड की निक्कू यूनिट में सीमित हैं आईसीयू बेड, विस्तारीकरण के बाद बढ़ जाएंगी मेडिकल सुविधाएं

एम्स में ICU बेड नहीं मिलने से नवजात की मौत के हड़कंप

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ऋषिकेश : बीते रोज एक 12 दिन के नवजात शिशु को अन्यत्र ले जाने के प्रकरण पर एम्स अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि उस दिन बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखकर अस्पताल की इमरजेन्सी में भर्ती किया गया था। लेकिन बच्चे को तत्काल आईसीयू बेड की आवश्यकता थी और उस समय बच्चों के वार्ड में आईसीयू बेड खाली नहीं था। इसलिए नवजात बच्चे को अन्यत्र ले जाने की स्थिति उपजी है। एम्स अस्पताल के ’न्यूनेटल इन्टेन्सिव केयर यूनिट’ (निक्कू ) में आईसीयू बेड की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए एम्स अस्पताल प्रशासन के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि पीडियाट्रिक वार्ड के न्यूनेटल इन्टेन्सिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड बहुत ही सीमित हैं। कई बार ऐसी स्थिति भी आ जाती है कि आईसीयू बेड खाली न होने से बच्चे का तत्काल इलाज करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि 1 अगस्त की सांय 12 दिन के दिन के एक बच्चे को लेकर उसके परिजन इमरजेन्सी में पहंुचे थे। उस दौरान इमरजेन्सी में मौजूद चिकित्सकों ने बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखकर उसका तुरन्त प्राथमिक उपचार शुरू किया लेकिन बच्चे को सामान्य बेड के बजाय पीडियाट्रिक वार्ड इन्सेन्टिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड की आवश्यकता थी। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि उस समय पीडियाट्रिक वार्ड की इस यूनिट में पहले से ही गंभीर स्थिति वाले कई बच्चे एडमिट थे और कोई भी आईसीयू बेड खाली नहीं था इसलिए तत्कालिक स्थिति को देखते हुए बच्चे के परिजनों को इलाज हेतु उसे अन्यत्र अस्पताल ले जाना पड़ा।

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प्रोफेसर मित्तल ने यह भी बताया कि अस्पताल की इमरजेन्सी में प्रत्येक मरीज को देखा जाता है और उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति के मरीजोें के लिए सम्बन्धित वार्ड में वेन्टिलेटर बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद ही भर्ती करने की प्रक्रिया अमल में लायी जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा एम्स को 200 एकड़ जमीन देने की कार्रवाई गतिमान है। जमीन मिलते ही अस्पताल की सुविधाओं में इजाफा होना स्वभाविक है और इस प्रकार की समस्याओं का स्वतः ही निराकरण हो जायेगा।

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