ऋषिकेश : राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया संरक्षण का महत्व

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- बाघ बचेंगे तो बचेगा जंगल, जंगल बचेगा तो सुरक्षित रहेगा जीवन
ऋषिकेश : अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वसुंधरा संस्था की ओर से डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाघ संरक्षण और जैव विविधता के महत्व से रूबरू कराया गया। कार्यक्रम में राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने उत्तराखंड में बाघों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण के प्रयासों और पर्यावरण संतुलन में उनकी अहम भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य शिव सहगल, राजाजी टाइगर रिजर्व के एसीएफ अजय लिंगवाल, वार्डन चित्राजंलि नेगी ने किया। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे जंगल के स्वास्थ्य का संकेतक (इंडिकेटर) है। जिस जंगल में बाघ सुरक्षित होते हैं, वहां वन, जल स्रोत, जैव विविधता और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहता है। इसलिए बाघों का संरक्षण वास्तव में प्रकृति और मानव जीवन दोनों की सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र बाघों के सुरक्षित आवास हैं। यहां आधुनिक तकनीकों, कैमरा ट्रैप, एम-स्ट्राइप्स गश्त, वन्यजीव गलियारों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने बाघों के व्यवहार, उनके आवास, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने सरल और रोचक ढंग से उत्तर दिया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। वसुंधरा संस्था की उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के आयोजन में आचार्य सोनिया राज से सहयोग किया।



