नैनीताल : UKSSSC LT भर्ती मामला, अभ्यर्थियों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आयोग ने वापस ली स्पेशल अपील

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नैनीताल :उत्त्तराखण्ड में सरकारी नौकरी पाना मतलब नया जीवन पाना हो जाता है कई मामलों में। क्योँकि भर्ती निकलती है मुश्किल से फिर नियुक्ति प्रक्रिया इतनी जटिल, विवादित हो जाती है वह मामला कोर्ट या गोलज्यू देवता के चौखट तक पहुंच जाता है।तब तक,  नौकरी बाहर से आये हुए लोगों के पास सरक जाती है। पहाड़ का ब्यक्ति आस लगाए ही राह जाता है। लेकिन कोर्ट और गोलज़्यू के यहां गया जो, वहां न्याय जरूर मिलता है अगर मामला ठीक है तो। ऐसा ही कुछ शिक्षकों की भर्ती  मामले में भी हुआ है।

उल्लेखनीय है, UKSSSC LT भर्ती में अभ्यर्थियों की बड़ी जीत हुई है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आयोग ने वापस ली स्पेशल अपील; 3 महीने में  नियुक्ति मिलने की संभावना पूरी लग रही है।

उत्तराखंड सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड 2024 भर्ती के संशोधित परिणाम और नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए राहत की यह बड़ी खबर है। पिछले 10 महीनों से कानूनी दांव-पेच और तारीखों के खेल में उलझी इस भर्ती में आखिरकार अभ्यर्थियों की सत्य, धैर्य और कड़े संघर्ष की जीत हुई है। नैनीताल हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बेंच में चली  सुनवाई के बाद उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) को पीछे हटना पड़ा है। कोर्ट की सख्त नाराजगी के बाद आयोग ने अपनी स्पेशल अपील (Special Appeal) वापस ले ली है, जिसके बाद अब पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है ! अभ्यार्थियों ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की हैं।

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मामले में मुख्य याचिकाकर्ताओं की कड़ी मेहनत लाई रंग ।याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इस ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने में मुख्य याचिकाकर्ता नवीन सिंह असवाल, किशन चंद, राहुल कुमार, विमल पांडे, जतिन कुमार, अंकित राणा और रश्मि डोभाल  ने अग्रणी भूमिका निभाई। इन अभ्यर्थियों ने UKSSSC कार्यालय के चक्कर काटने से लेकर कोर्ट रूम की चौखट तक दिन-रात एक किया । आयोग की हीलाहवाली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ इन युवाओं ने न सिर्फ मजबूत कानूनी पैरवी करवाई, बल्कि मानसिक प्रताड़ना झेलते हुए भी मैदान में डटे रहे।  जिसके परिणामस्वरूप  सैकड़ों पात्र बेरोजगारों के घरों में न्याय का दीया जला है।

कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट (Contempt of Court)-
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ इस हफ्ते की शुरुआत में आया। जब 1 जून (सोमवार) को सिंगल बेंच में दायर अवमानना याचिका (Court of Contempt) पर सुनवाई के दौरान UKSSSC के सचिव व्यक्तिगत रूप से उच्च  न्यायालय नैनीताल के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश ने कोर्ट के आदेश की लगातार अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि क्यों न कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की धारा 12 के तहत सचिव पर चार्ज (आरोप) तय कर उन्हें 6 महीने की जेल भेज दिया जाए। कोर्ट के इस तल्ख तेवर से आयोग और सरकारी खेमे में खलबली मच गई।

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24 घंटे की मोहलत और डबल बेंच का दिया हवाला-
जेल जाने और चार्ज लगने के डर से आयोग के वकील ने कोर्ट से तुरंत राहत की गुहार लगाई। उन्होंने दलील दी कि मामले की सुनवाई  2 जून  को मुख्य न्यायाधीश (CJ) की अध्यक्षता वाली खंडपीठ (Division Bench) में ‘स्पेशल अपील’ के तहत होनी है। आयोग के वकील ने चेयरमैन से इस विषय पर अंतिम निर्देश लेने के लिए न्यायालय से 24 घंटे की मोहलत मांगी। इसके बाद अवमानना की सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली तारीख  ३ जून  तय की गई।

3 जून: ऐतिहासिक दिन, आयोग ने घुटने टेके, वापस ली अपील-
3 जून का दिन उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के संघर्ष के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ (CJ Bench) और सिंगल बेंच दोनों जगह मामले की समानांतर सुनवाई हुई। फैसला पीड़ित अभ्यर्थियों के पक्ष में दिया।अब अगके तीन महीने में नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। फैसले से याचिकाकर्ताओं के चेहरे पर मुस्कान लौटी है।

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