ऋषिकेश : स्वामी समर्पण आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उत्साह के साथ संपन्न

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- व्यास पूजा, शिव पूजा, महायज्ञ, कर्म संन्यास दीक्षा, साधु भंडारा एवं निःशुल्क अन्न प्रसाद वितरण का आयोजन
ऋषिकेश : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्वामी समर्पण आश्रम में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से तथा ऑनलाइन लाइव प्रसारण के माध्यम से जुड़कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्ति अर्पित की।महोत्सव का शुभारंभ महर्षि वेदव्यास जी की पावन स्मृति में व्यास पूजा से हुआ। इसके पश्चात भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना एवं महायज्ञ संपन्न हुआ। सभी वैदिक अनुष्ठान आचार्य पुरुषोत्तम पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न कराए गए। 

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक एवं संत-महात्मा उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से भावना, हरीश, कपिल, देवीप्रियनंदा सरस्वती (पूर्व नाम: योगिनी अनामिका), पूर्व प्रधान भगवान पंडित सहित अनेक भक्तों ने पूजा, यज्ञ एवं गुरु वंदना में सहभागिता की।गुरु पूर्णिमा समारोह का प्रमुख आकर्षण कर्म संन्यास दीक्षा समारोह रहा। इस पावन अवसर पर योगिनी अनामिका को अवधूत परमहंस स्वामी समर्पणानंद सरस्वती द्वारा विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कर्म संन्यास दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा के उपरांत उन्हें नई आध्यात्मिक पहचान के रूप में “देवीप्रियनंदा सरस्वती” नाम प्रदान किया गया।
इस पवित्र अवसर पर देवीप्रियनंदा सरस्वती ने गुरु परंपरा के प्रति समर्पण, आध्यात्मिक साधना, निःस्वार्थ सेवा एवं सनातन धर्म के आदर्शों के पालन का संकल्प लिया। उपस्थित श्रद्धालुओं एवं साधकों ने इस दिव्य आध्यात्मिक क्षण के साक्षी बनकर गुरु कृपा का अनुभव किया।गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत साधु भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संत-महात्माओं का श्रद्धापूर्वक सत्कार एवं भोजन कराया गया। साथ ही आश्रम द्वारा सभी श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के लिए निःशुल्क अन्न प्रसाद (भोजन) वितरण किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा, करुणा एवं सद्भावना के इस आयोजन का लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का ऑनलाइन लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसमें विदेशों में निवास कर रहे अनेक भक्तों एवं साधकों ने जुड़कर गुरु पूर्णिमा उत्सव में सहभागिता की। दूर देशों में बैठे श्रद्धालुओं ने भी पूजा, यज्ञ, मंत्रोच्चार एवं गुरु वंदना के आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।कार्यक्रम का समापन गुरु वंदना, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित भक्तों ने गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धर्म, सेवा, सदाचार एवं मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।



