RJ : ग्राम देवली आउवा में वैदिक सनातन धर्म प्रचार यात्रा का भव्य आगमन 

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पाली  : राजस्थान के पाली जिले की पावन धरा पर स्थित ग्राम देवली आउवा में 4 अप्रैल 2026 का दिन अत्यंत ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। इस शुभ अवसर पर श्री जगद्गुरु परमपूज्य योगानंदाचार्य श्री श्री 1008 श्री दयाराम देवाचार्य जी महाराज (श्री रामजी मंदिर, ब्रह्मपुरी, ऋषिकेश – उत्तराखंड) के पावन सानिध्य में चल रही वैदिक सनातन धर्म प्रचार यात्रा का ग्राम में आगमन हुआ।
यह यात्रा अपने उद्गम स्थल ऋषिकेश से प्रारंभ होकर उत्तर भारत के अनेक राज्यों में धर्म, संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं का संदेश फैलाती हुई जन-जन को जागृत कर रही है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की मूल शिक्षाओं, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों को पुनः समाज में स्थापित करना है।हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यह यात्रा 4 अप्रैल 2026 को हमारे ग्राम देवली आउवा में पहुंची, जहाँ श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री ईश्वरदास जी महाराज (श्री सीतारामजी की धूणी) के सानिध्य में दो दिवसीय विश्राम (वास) किया गया। विशेष बात यह है कि श्री ईश्वरदास जी महाराज, श्री जगद्गुरु परमपूज्य योगानंदाचार्य श्री श्री 1008 श्री दयाराम देवाचार्य जी महाराज के परम शिष्य हैं, जिससे इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया।इस पावन अवसर पर ग्राम में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे गांव में धार्मिक वातावरण बना रहा—भजन-कीर्तन, सत्संग, कथा एवं प्रवचनों के माध्यम से ग्रामवासियों को धर्म, कर्म और संस्कारों का संदेश दिया गया। ग्रामीणों ने अत्यंत श्रद्धा भाव से संत-महात्माओं का स्वागत किया और उनके आशीर्वाद प्राप्त किए।
ग्राम के प्रत्येक वर्ग—युवा, वृद्ध, महिलाएं एवं बच्चे—इस आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागी बने। यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को जागृत करने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुई।
मेरे लिए यह विशेष गौरव और सौभाग्य का विषय है कि ऐसे महान संत, श्री जगद्गुरु परमपूज्य योगानंदाचार्य श्री श्री 1008 श्री दयाराम देवाचार्य जी महाराज मेरे दादागुरु हैं। उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए मैं स्वयं को धन्य अनुभव करता हूँ।अंततः, वैदिक सनातन धर्म प्रचार यात्रा का ग्राम देवली आउवा में आगमन न केवल धार्मिक चेतना का जागरण था, बल्कि यह हमारे गांव के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया। इस पावन आयोजन ने ग्रामवासियों के हृदय में धर्म, भक्ति और एकता की ज्योति प्रज्वलित कर दी।

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