यूपी : सुल्तानपुर की कवियत्री डॉ निरुपमा श्रीवास्तव को शिकोहाबाद में मिला सम्मान
- अवधी भाषा में उनके योगदान हेतु किया गया सम्मानित
दीपांकुश चित्रांश की रिपोर्ट…खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से है जहाँ साहित्य- संगीत-कला को समर्पित संस्था शब्दम् ने 11 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में बजाज इले.लि. आवासीय परिसर स्थित संस्कृति भवन सभागार में महिला सम्मान समारोह एवं काव्य पाठ का आयोजन किया। आपको बता दें इस समारोह में सुल्तानपुर की कवियत्री डॉ निरुपमा श्रीवास्तव ने अवधी भाषा मे एकल काव्यपाठ किया,अवधी भाषा में उनके योगदान हेतु उन्हें सम्मानित भी किया गया । डाॅ. निरुपमा श्रीवास्तव ने अपने काव्य पाठ में ‘दुख जौ न होये जीवन मा सुख कै परिभाषा का होए,सरबस जौ पूरी रहा बोला कौनो अभिलाषा का होए। मावस बिन पूरनमासी के अस्तित्व रहे का यहि जग मा, जौ रात न होने अधियारी तौ चमके चांद कहा नभ मा..’ सुनाकर लोगों को अवधी भाषा से जोड़ दिया।
कार्यक्रम का संचालन एवं अध्यक्षता कर रहे डाॅ. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सनातन संस्कृति नारी को पुरुष की तुलना में अत्यधिक सम्मान दिया गया है! ‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सवास्तत्राफलाः क्रिया।।’’ अर्थात जहां नारी को पूजा जाता है वहां देवता निवास करते हैं और जहां नहीं पूजा जाता वहां सारी शुभ क्रिया असफल हो जाती है। वर्ष में दो बार नवरात्र में बेटियों का पूजन, और राम से पूर्व सीता,कृष्ण से पूर्व राधा,शंकर से पूर्व गौरी का नाम लिया जाता है। जन्मदात्री माता के साथ पशुओं,नदियों, ग्रन्थों और धरती को भी क्रमशः गौ,गंगा और भारत माता कहा गया है। भारतीय संस्कृति में मातृसत्ता सदैव पूज्य रही है। गार्गी,अपाला,घोषा,अरूंधति आदि नारियां वेदों की ऋषिकाओं में वंदनीय हैं।



