UK : लेफ्टिनेंट वीरेश्वर गोस्वामी की सैनिक सम्मान के साथ अन्तयेष्टि
नम आंखों के साथ अल्मोड़ा वासियों ने ढ़ी श्रद्धांजलि

अल्मोड़ा : जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे “ऑपरेशन शेरूवाली” के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। भारतीय सेना की 5 असम रेजिमेंट में तैनात युवा अधिकारी तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे थे, तभी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हादसा हो गया।
जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरी खाई में जा गिरे। साथी जवानों ने जान जोखिम में डालकर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और उन्हें बाहर निकालकर सेना के 150 जनरल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
महज 25 वर्ष की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के बगवालीपोखर क्षेत्र के रहने वाले थे। वर्तमान में उनका परिवार पांडेखोला में रह रहा है। उन्होंने 8 जून 2024 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था और तभी से देश सेवा में पूरी निष्ठा से जुटे हुए थे। बीरेश्वर ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से शिक्षा प्राप्त की थी। उनके पिता के अनुसार बचपन से ही उनमें सेना में जाने का जुनून था। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने परिवार से कहा था — “मैंने सेना का राशन खाया है, मुझे सेना में ही जाना है।” यही नहीं, सेना में भर्ती होने के लिए उन्होंने कई नौकरियों के प्रस्ताव तक ठुकरा दिए थे।
शहादत की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड, खासकर अल्मोड़ा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।जब शहीद अधिकारी का पार्थिव शरीर वायुसेना के विशेष विमान से अल्मोड़ा पहुंचा तो पूरा इलाका “भारत माता की जय” और “बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। लोगों की आंखें नम थीं लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का अंतिम संस्कार अल्मोड़ा के विश्वनाथ घाट में पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ किया गया। देश ने अपना एक वीर सपूत खो दिया, लेकिन उनकी शहादत हमेशा आने वाली पीढ़ियों को मातृभूमि के लिए समर्पण और साहस की प्रेरणा देती रहेगी।



