UK : ऋषिकेश से ग्राफिक एरा हॉस्पिटल देहरादून के लिए निशुल्क बस सेवा शुरू

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  • परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में हुआ निःशुल्क रोगी बस सेवा का शुभारम्भ
  • ऋषिकेश से देहरादून तक स्वास्थ्य सेवा की नई जीवनरेखा बनेगी ‘फ्री पेशेंट बस सेवा’
ऋषिकेश :  करुणा, सेवा और मानवता के संकल्प को साकार करते हुए आज परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ऋषिकेश से देहरादून तक संचालित निःशुल्क रोगी बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुभारम्भ किया। यह सेवा ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल, देहरादून की जनकल्याणकारी पहल है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर महंत  रघुवीर गिरि  महाराज (वीरभद्र महादेव मंदिर, ऋषिकेश),  शम्भू पासवान (महापौर, नगर निगम, ऋषिकेश) तथा  प्रतीक कालिया  (जिला महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी, ऋषिकेश एवं महामंत्री, नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल) सहित संत समाज, चिकित्सकगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।अपने प्रेरक संदेश में स्वामी  ने कहा कि “भारतीय संस्कृति में सेवा सबसे बड़ी साधना है। रोगी की सेवा केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि ईश्वर की प्रत्यक्ष आराधना है। जब किसी पीड़ित के जीवन में आशा का दीप जलता है, तभी मानवता का वास्तविक उत्सव प्रारम्भ होता है।”उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल आधुनिक अस्पतालों की नहीं, बल्कि ऐसी संवेदनशील व्यवस्थाओं की भी है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करें। आर्थिक अभाव या परिवहन की कठिनाई किसी भी व्यक्ति को उपचार से वंचित न करे—इसी भावना को यह पहल साकार करती है।
पूज्य स्वामी ने ग्राफिक एरा हॉस्पिटल एवं ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला जी की इस सेवा-भावना की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक गाँव, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुँचना ही उसका वास्तविक उद्देश्य है। यही राष्ट्रधर्म, मानवधर्म और सनातन धर्म का सच्चा स्वरूप है।यह निःशुल्क बस सेवा अनेक जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा की नई किरण बनेगी और समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करेगी।
 “माधव सेवा ही मानव सेवा है।”
– पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी

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