ऋषिकेश : गौरा देवी चौक के पास स्कूटी सवार दो महिलाओं को ट्रक ने मारी टक्कर, एक गंभीर एम्स में भर्ती

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ऋषिकेश: गुरुवार दोपहर लगभग 1:30 बजे के लगभग गौरा देवी चौक के समीप गढ़वाल मंडल विकास निगम के सामने एक ट्रक के द्वारा पीछे से स्कूटी सवार महिला दीपा और उसकी भतीजी दुर्गा भंडारी को ट्रक द्वारा टक्कर मार दी गई।

जिसमें 20 वर्षीय दुर्गा भंडारी निवासी खांडगांव छिटककर सड़क पर गिर गई। जिसको देखकर वहां से गुजर रहे भाजपा मंडल अध्यक्ष दिनेश सती ने ट्रक के सामने अपनी स्कूटी खड़ी करके रोकने का पूरा प्रयास किया, लेकिन भारी सामान से लदे ट्रक ने तब तक लड़की के पैर पर टायर चढ़ा दिया था। जिसमे वह अतिगंभीर रूप से घायल हो गई और मंडल अध्यक्ष सती के द्वारा शोर मचाने पर ट्रक वाला उतरकर भागने लगा। पीछा करने पर वहां से गुजर रहे श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज के खेल कोच प्रवीन रावत और रंजन अंथवाल ट्रक ड्राइवर के पीछे भागे और पकड़ कर लाए व पुलिस के हवाले किया।

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इसी बीच जब इस घटना की सूचना जय गुरुदेव एंबुलेंस यूनियन की अध्यक्ष और भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य दीपिका अग्रवाल को हुई तो उन्होंने तुरंत एंबुलेंस भेज कर घायल दुर्गा भंडारी को तुरंत एम्स में भर्ती करवा कर व सीटी स्कैन और एक्स-रे करवा कर व सभी जांच करवाकर ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचाकर मानवता का धर्म निभाया। जहां खबर लिखे जाने तक शाम 6:00 बजे तक पैर का ऑपरेशन चल रहा था लेकिन एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि पैर को बचा पाना बहुत मुश्किल है। दुर्गा की जान बचाने के लिए पैर को काटा जाना अनिवार्य भी हो सकता है। क्योंकि जांघ के नीचे पैर में मांसपेशियां बिल्कुल खत्म हो गई हैं । ऑपरेशन में रक्त की अधिक आवश्यकता को देखते हुए पूर्ति करने के लिए पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट ने पूर्ण आश्वासन दिया है और कहा कि खांड गांव ऋषिकेश की बेटी को रक्त की कोई कमी नहीं होने देंगे। वहां पर उपस्थित लोगों का कहना है कि यदि मंडल अध्यक्ष दिनेश सती सूझबूझ व हिम्मत ना दिखाते तो ट्रक वाला लड़की को कुचल कर फरार हो जाता।

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इसलिए प्रत्येक नागरिक को कहीं भी कोई दुर्घटना हो तुरंत सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए, जिससे दुर्घटना को रोका जा सकता है और किसी की जान बचाई जा सकती है।20 वर्षीय दुर्गा भंडारी के पिता की 4 साल पूर्व निधन हो चुका है और कुछ दिन पहले दुर्गा ने पुलिस का फिजिकल टेस्ट पास कर लिया था और अपनी मौसी के पास रहकर रिटर्न की तैयारी कर रही थी। दुर्गा की मां गांव में रहकर अपना गुजर बसर करती हैं। इस दुर्घटना से दुर्गा और उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।

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