ऋषिकेश : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऋषिकेश के धार्मिक स्वरूप में हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त की, बोले वर्तमान में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने कहा कि गुरु परंपरा को पुनर्जीवित किए जाने की आवश्यकता है

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ऋषिकेश : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने ऋषिकेश के धार्मिक स्वरूप में हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहां वेद और शास्त्र का परायण होता था वहां वर्तमान में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

स्थानीय दयानंद सरस्वती आश्रम के सभागार में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने कहा कि गुरु परंपरा को पुनर्जीवित किए जाने की आवश्यकता है। गुरु केवल ज्ञान दाता, मार्गदर्शक ही नही बल्कि मानव जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त भी करता है।ब्रह्मलीन स्वामी दयानंद सरस्वती को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि दयानंद सरस्वती जी से उनका काफी पुराना संबंध रहा। कहा कि सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा उसे हमेशा याद किया जायेगा । उन्होंने गंगा के प्रवाह को बनाये रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा अब जगह जगह बाँध बनाकर, नहरें निकाल कर प्रवाह को रोका जा रहा है. दूसरा उन्होंने मांग एक तीर्थाटन मंत्रालय भी बनाया जाए. तीर्थाटन परिभाषित हो जायेगा तो अन्य चीजें भी हो जाएँगी. ये मैं काफी समय से मांग कर रहा हूँ.

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दयानंद सरस्वती आश्रम के अध्यक्ष स्वामी साक्षात्कृतानंद नंद सरस्वती महाराज ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के अभीषिक्त होने पर शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर पर स्वामी शुद्धानंद सरस्वती, सहजानंद, ज्योर्तिमठ प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद, अभिषेक चैतन्य, कार्यक्रम संयोजक महंत रवि प्रपन्नाचार्य ,ब्रह्मचारी स्वामी शंकर तिलक आनंद, लटन दास महाराज, मंहत आशुतोष पुरी, प्रबंधक गुणानंद रयाल, अजय पांडे, उमेश सती, प्रकाश रावत, इसमें राधा बल्लभ भट्ट और एलपी रतूड़ी आदि उपस्रिथ रहे। कार्यक्रम का संचालन डा बृजेश सती ने किया।

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