ऋषिकेश को मिला पहला निःशुल्क स्टील क्रॉकरी बैंक, प्लास्टिक मुक्त शहर की ओर कदम

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  • भोजन कार्यक्रमों में अब नहीं होगा प्लास्टिक कचरा – मां अन्नपूर्णा निःशुल्क क्रॉकरी बैंक प्रारंभ
  • नगर निगम क्षेत्र में अनोखी पहल, नागरिकों को मिलेगा स्टील बर्तनों का निःशुल्क उपयोग
ऋषिकेश : सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, आवास विकास, वीरभद्र मार्ग, ऋषिकेश में मंगलवार 23 सितम्बर 2025 को मां अन्नपूर्णा निःशुल्क स्टील क्रॉकरी बैंक का शुभारंभ किया गया। नगर निगम क्षेत्र में प्लास्टिक और डिस्पोजेबल, तथा उनमें लगी जूठन के कचरे को समाप्त करने की दिशा में यह अभिनव पहल एक महत्वपूर्ण कदम है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेयर माननीय शंभु पासवान जी रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि –“यह क्रॉकरी बैंक ऋषिकेश को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ नगर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक योगदान देगा। इस प्रकार की पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकती है। नगर निगम नागरिकों के साथ मिलकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की हर कोशिश को मजबूत करेगा।”
मुख्य संरक्षक हेमन्त गुप्ता  ने कहा कि क्रॉकरी बैंक नगर को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।संस्था के अध्यक्ष नरेश कुमार गर्ग, सचिव विवेक टण्डन, सह सचिव नन्द किशोर, कोठारी सुरेश सैनी, कोषाध्यक्ष मदन लाल वालिया, संरक्षक उमाकांत पंत, नन्दकिशोर भट्ट सहित सभी पदाधिकारी एवं नगर के अलग-अलग क्षेत्रों के अनेक गणमान्य जन मौजूद रहे।विशेष रूप से राजेन्द्र प्रसाद पांडेय, गोपाल नारंग, समर बहादुर चौहान, रोमा सहगल, महेश चिटकारिया,  राइस अप मिनिस्ट्री वर्क हेल्थ से चांदनी जी, मंजू बडोला एवं सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज आवास विकास विद्यालय परिवार ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र व बैज अलंकृत कर किया गया।
संस्था के मुख्य संरक्षक हेमंत गुप्ता ने बताया कि इस क्रॉकरी बैंक से कोई भी नागरिक अपने निजी या सार्वजनिक आयोजन जैसे भंडारा, विवाह, जन्मदिन, उत्सव आदि के लिए निःशुल्क स्टील की थाली, कटोरी, गिलास व चम्मच ले सकता है। उद्देश्य हर वर्ष लगभग 5 लाख प्लास्टिक एवं डिस्पोजेबल कटलरी को कचरे में जाने से रोकना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।संस्था के मीडिया प्रभारी नरेन्द्र खुराना ने कहा कि पर्यावरण को दूषित किए बिना यह बर्तन बैंक योगनगरी ऋषिकेश के लिए एक वरदान साबित होगा।कार्यक्रम के  समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य  व संस्था के संरक्षक उमाकांत पंत ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए एक संदेश दिया डिस्पोजेबल छोड़िए, स्टील-बर्तनों को अपनाइए,स्वच्छ पर्यावरण और प्लास्टिक मुक्त समाज बनाइए।”।

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