ऋषिकेश : डाट काली मंदिर प्रधानमंत्री मोदी इसलिए आ रहे हैं, जानिये स्वामी रसिक महाराज ने क्या कहा
- देहरादून सीमा पर पड़ता है डाटकाली मंदिर, लेकिन मंदिर सहारनपुर में पड़ता है, यानी उत्तर प्रदेश में
- बीच में छोटी सी सुरंग है, सुरंग के इस पार देहरादून और सुरंग के उस पर मंदिर और सहारनपुर जिला यानी उत्तर प्रदेश
- प्रमुख संत नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने प्रधानमंत्री मोदी के डाटकाली में दर्शन करने जाने को लेकर अहम खुलाशा किया है
- स्वर्गाश्रम स्थित गीता आश्रम में आश्रम संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी वेदव्यासानंद सरस्वती की 34वीं पुण्यतिथि मनाई गयी. उसी में रसिक महाराज पहुंचे थे.
ऋषिकेश :(मनोज रौतेला) सोमवार को प्रमुख संत नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, जो अध्यक्ष भी हैं, उत्तर प्रदेश सनातन धर्म परिषद के (कैबिनेट मंत्री का दर्जा), उन्हूने बताया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्योँ देहरादून सीमा पर प्रसिद्द मंदिर डाट काली मंदिर आ रहे हैं ? महाराजश्री लक्ष्मण झूला स्थित गीता आश्रम में आयोजित आश्रम संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी वेदव्यासानंद सरस्वती की 34वीं पुण्यतिथि मनाई गयी थी उसी में रसिक महाराज पहुंचे थे. कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे. इस दौरान उन्हूने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अहम बात कही. खास तौर पर 14 अप्रैल (मंगलवार) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देहरादून दौरे पर उन्हूने अहम बात कही. उन्हूने कहा, यहाँ से बंगाल कनक्शन है….यहाँ से सन्देश बंगाल जायेंगा. वहां मां काली के भक्तों के लिए एक सन्देश है. कमल का फूल कभी ना भूल….उल्लेखनीय है बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं. ऐसे में पहले चरण का मतदान हो चुका है. भाजपा हर हालात में बंगाल में जीत दर्ज कराना चाहती है. ममता बनर्जी की सरकार को बाहर का रास्ता दिखाना चाहती है. महाराज ने कहा, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी एक सन्देश देना चाहते हैं. उन्हूने कहा, प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड को एक अलग पहचान दी है. उन्हूने कहा, शक्तिपीठ डाट काली से सन्देश पश्चिम बंगाल जायेगा. वहां की की सर्वे माई काली हैं…यहाँ की भी माई डाटकाली हैं. वहां भी काली माँ के जितने भक्त हैं उनको सन्देश जायेंगा कमल का फूल कभी न भूल…!! इस दौरान उनके महंत रवि प्रपन्नाचार्य, प्रो. दीपक गुप्ता, भानुमित्र शर्मा,अभिषेक शर्मा व अन्य लोग मौजूद रहे. उल्लेखनीय है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे के कारण मां डाट काली मंदिर में भक्तों का प्रवेश रविवार शाम से मंगलवार दोपहर दो बजे तक प्रतिबंधित रहेगा. सुरक्षा कारणों से यह निर्णय मंदिर समिति की बैठक में लिया गया.
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डाट काली मंदिर –
इस मंदिर का इतिहास सन् 1804 से शुरू होता है, जब देहरादून और सहारनपुर राजमार्ग का निर्माण हो रहा था। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, परियोजना की देखरेख कर रहे अभियंता ने निर्माण के दौरान सपने में देवी काली के दर्शन किए, जो इस बात का संकेत है कि देवी काली उस स्थान के निकट ही प्रकट होती हैं।



