परमार्थ परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल पहुंचे जल प्रहरी सम्मान कार्यक्रम में

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- छठा संस्करण जल प्रहरी 2025 सम्मान कार्यक्रम आयोजित हुआ परमार्थ निकेतन में
- सुजलम भारत की दिशा में एक प्रेरक पहल, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, आध्यात्मिक गुरु पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का पावन सान्निध्य
- केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल हेस्को के संस्थापक पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी और अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही
- अनिल सिंह, मनोज पाण्डेय , संकेत चतुर्वेदी , अजय गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान
- जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जल योद्धाओं को जल प्रहरी सम्मान प्रदान
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस की जयंती और सुप्रसिद्ध सितार वादक पं. रविशंकर की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि
- संयुक्त राष्ट्र बाल कोश दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
- इंटरनेशनल माउंटेन डे—आइए संकल्प लें: पर्वतों की रक्षा ही भविष्य की रक्षा
- पर्वत बचेंगे तो मानवता बचेगी -पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- दिव्य जल प्रहरी 2025 — राष्ट्र एवं प्रकृति जागरण का संदेश
दिल्ली/ऋषिकेश, 11 दिसंबर—नमामि गंगे और अनेक प्रमुख संस्थाओं द्वारा आयोजित जल प्रहरी 2025 पहल राष्ट्र निर्माण, प्रकृति संरक्षण और मानवता के उत्थान का दिव्य आह्वान है। छठे संस्करण का शुभारंभ परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी सहित अनेक माननीय मंत्रियों, सांसदों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की।जल प्रहरी 2025 केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत को सुजलम–सुफलम, हरित–पवित्र बनाने का राष्ट्रीय आंदोलन है।पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा—“जल केवल तत्व नहीं, जीवन का प्रथम मंत्र और धरती का प्राण है। जब तक जल सुरक्षित नहीं होगा, तब तक जीवन और सभ्यता सुरक्षित नहीं हो सकती।”उन्होंने संयुक्त राष्ट्र बाल कोश दिवस पर बच्चों के लिए जल संरक्षण को प्रथम राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।पाटिल ने जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अटल भू-जल योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर नागरिक को जल संरक्षण का प्रहरी बनना होगा।डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंटरनेशनल माउंटेन डे पर पर्वतीय पारिस्थितिकी संरक्षण को अत्यंत आवश्यक बताया।इस पावन अवसर पर जल, प्रकृति और मानवता की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।





