ऋषिकेश: मुख्यमंत्री के दौरे से पहले रातों-रात भरे गए गड्ढे, लेकिन बापूग्राम की जनता 175 दिनों से अपने आशियाने की लड़ाई लड़ने को मजबूर सरकार की आँखों में पट्टी – जयेंद्र रमोला
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ऋषिकेश : शनिवार यानी दिनांक 4/7/2026 को जयेंद्र रमोला ने जारी बयान में कहा कि एक ओर बापूग्राम की जनता पिछले 176 दिनों से अपने घरों की छत बचाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार धरने पर बैठी हुई है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आईडीपीएल ग्राउंड में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में जनता को विकास के बड़े-बड़े दावे और भाषण देने पहुंचे। यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
वहीं दूसरी ओर बापूग्राम के सैकड़ों परिवार पिछले 175 दिनों से अपने भविष्य और अपने घरों को बचाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन आज तक न तो सरकार ने उनकी सुध ली और न ही उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल की। कई बार ज्ञापन देने और जनप्रतिनिधियों से मिलने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं।बापूग्राम की सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण अनेक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और आम जनता को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि मुख्यमंत्री के रूट प्लान को देखते हुए रातों-रात उन्हीं सड़कों के गड्ढे भर दिए गए, जिनकी मरम्मत के लिए जनता वर्षों से मांग कर रही थी। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार और प्रशासन के पास काम कराने के लिए संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि आम जनता की समस्याओं के प्रति इच्छाशक्ति का अभाव है। यदि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सड़कें सुधारी जा सकती हैं, तो फिर आम नागरिकों के लिए यही कार्य समय पर क्यों नहीं किया जाता?
रमोला ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं एवं संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्कूल से छुट्टी करवाकर घंटों बैठाकर अपने भाषण सुनवायी गये । यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए बच्चों का सहारा ले रही है, जबकि उन्हीं बच्चों के भविष्य से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। रमोला ने कहा कि अब प्रदेश भाजपा सरकार से जनमानस का विश्वास उठ गया है इसीलिये अपनी नाकामी छुपाने के लिये ये कार्यक्रम किया गया जो कि कुछ घंटों के कार्यक्रम के लिये करोड़ों रूपयों को अनावश्यक रूप से खर्च किया गया ।



