UK :राजाजी नेशनल पार्क में युवा नर हाथी रैंग रैंग कर तड़प रहा है दर्द में, लेकिन उपचार करे कौन ?
मामले में वन विभाग खामोश है, जबकि जानकारी सभी को है

- लगभग एक महीने से गौहरी रेंज से ऋषिकेश रेंज में आवाजाही कर तड़प रहा है युवा नर हाथी, नहीं ले रहा कोई सुध
- वन विभाग अपनी टीम भेज कर इतिश्री कर रहा है, लेकिन उपचार नहीं करवा पा रहा है
- खदरी इलाके में सोमवार को फिर से घुसा तड़पते हुए हाथी फिर ग्रामीणों, वन कर्मियों ने खदेड़ा वापस गौहरी रेंज में
- वन्य जीवों को बचाने दे दावे हो रहे हैं हवा-हवाई, ऐसे में कैसे बचेंगे वन्य जीव ?
- बेजुबान जानवर की कौन सुने ? कौन ले सुध ? राजाजी नेशनल पार्क का है मामला
ऋषिकेश : वन्य जीवों को संरक्षण करने का दावा यहाँ हवाई हवाई साबित हो रहा है….एक युवा नर हाथी पिछले लगभग एक महीने से घायल अवस्था में रगड़- रगड़ कर तड़पने को मजबूर है. लेकिन हैरानी की बात इतने दिन हो गए अब तक इसका उपचार नहीं हो सका है….उसके बताया जा रहा है पिछले दोनों पैरों में चोट है. मामला राजाजी नेशनल पार्क का है. लेकिन वन विभाग समझ से परे है, इसका उपचार क्योँ नहीं कर पा रहा है ? ग्रामीणों के मुताबिक़, खदरी इलाके में यह हाथी कई बार शाम के वक्त गौहरी रेंज से ऋषिकेश रेंज में (कुछ हिस्सा ऋषिकेश रेंज में आता है) आ रहा है. बीच में गंगा नदी है…गंगा नदी के पार गौहरी रेंज है जबकि इधर की तरह ऋषिकेश रेंज. खदरी का इलाका ऋषिकेश रेंज में पड़ता है. यह हाथी, रेंगते हुए. ग्रामीणों के मुताबिक़ इसे फिर नदी पार यानी गौहरी रेंज की तरफ खदेड़ दिया जाता है. हो सकता है हाथी इसलिए आबादी की तरफ आ रहा है वह मदद चाह रहा हो. आपको बता दें, हाथी बड़ा समझदार जानवार माना जाता है. लेकिन उसका दर्द, उसकी तड़प कौन समझे ? खदरी निवासी पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने मांग की है, यह वन्य जीवों का मामला है, इतनी दिनों से एक युवा हाथी दर्द से तड़प रहा है. इस मामले में नेशनल पार्क को तुरंत संज्ञान में लेना चाहिए. इसमें चाहे गौहरी रेंज हो या ऋषिकेश रेंज या फिर मोती चूर…इस तरह से वन्य जीव को दर्द में नहीं रहने देना चाहिए. स्थानीय नवीन नदी ने की मांग इस तरह हाथी को तड़पते हुए वाकई दुखद है. पार्क प्रशासन को इसमें संज्ञान लेना चाहिए और उपचार करना चाहिए. संभवतःआपसी वर्चस्व को लेकर हाथी भिड़े होंगे उसी में चोट लगी हो इसको.
ग्रामीणों के मुताबिक़, यह हाथी लगभग ८ से १० वर्ष का है. इसके पीछे के पैर दोनों चोटिल हैं. हड्डी बाहर आई हुई दिखाई दे रही है. लेकिन बाहर नहीं दिख रही है. दूर से अंदाजा लगाया जा सकता है हड्डी निकली है टूट कर के….सोमवार देर शाम भी खदरी इलाके में इसकी आमद रही. ऋषिकेश रेंज की टीम भी पहुंची, क्यूंकि कुछ इलाका ऋषिकेश रेंज का लगता है खदरी में. फिर वापस नदी पार गौहरी रेंज चला गया. वहीँ पर यह दिन भर रहता है. ग्रामीणों के मुताबिक़, वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी है, लेकिन इसका उपचार करे कौन ? लाखों रुपये खर्च होंगे, दे कौन ? किसी की हिम्मत नहीं हो रही है. सरकार वन्य जीवों को बचाने के लिए लाख दावे करती है राजधानी के पास चोटिल हाथी का यह हाल है…..हाथी तड़प रहा है….रगड़ से चल रहा है. कौन स्टेप उठाये ? वन विभाग के दावों की भी इससे पोल खुलती है. ग्रामीणों का कहना है, रेंज-रेंज खेलने से अच्छा है इसका मिलकर या फिर सम्बंधित रेंज /पार्क इसका उपचार करे. इसको TRANCULISE कर उपचार कर चीला ले जाएँ तो इसकी जान बच सकती है. ऐसे में इन्फेक्शन/ सेप्टिक का खतरा बना रहेगा.



