UK : IYF 2026, प्रातः के प्रथम मेडिटेशन (ध्यान) सत्र का शुभारंभ दून योगपीठ देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डा0 बिपिन जोशी ने किया

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मुनि की रेती :  अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 में आज प्रातः के प्रथम मेडिटेशन (ध्यान) सत्र का शुभारंभ दून योगपीठ देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डा0 बिपिन जोशी के पावन सानिध्य में प्रार्थना के किया गया.  डा0 जोशी ने उपभोक्तावाद और बाजारवाद के इस युग में जब मनुष्य कमाना तो सीख गया है, किंतु जीवन जीना भूलते जा रहा है. छोटे छोटे बच्चे भी स्ट्रेस का शिकार हो रहे हैं.
ध्यान को आदर्श जीवन जीने का आधार बताया, जोशी ने कहा हमेशा चेतन अवस्था में रहने का नाम ही ध्यान है. आज संपूर्ण विश्व बारूद की ढेर में बैठा है. एक ओर ईरान इज़राइल, अमेरिका युद्ध है तो दूसरी ओर रसिया यूक्रेन युद्ध है. सम्पूर्ण विश्व में हर पड़ोसी देश एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं और एक दूसरे को खत्म करना चाहते हैं. ऐसे समय में योग और ध्यान ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं डा0 जोशी ने कहा समस्याओं का समाधान बाहर नहीं है बल्कि हमारे भीतर है. उन्होंने कहा स्वस्थ्य व्यक्ति का पैर गरम, पेट नरम और माथा ठंडा रहना चाहिए . यदि ठंडे और स्थिर मन से हम निर्णय लेंगे तो युद्ध की ओर नहीं बल्कि बुद्ध की ओर जाएंगे। उत्तराखंड को याेग ओर अध्यात्म की जननी बताते हुवे जोशी ने कहा उत्तराखंड दिशा के हिसाब से ही उत्तर में नहीं है. बल्कि जिस भी महापुरुष को स्वयं को जानने की इच्छा हुई है उसके कदम खुद ही देवभूमि उत्तराखंड की ओर पड़े हैं उनको स्वयं को जानने के बाद संपूर्ण विश्व को मार्गदर्शन का सौभाग्य मिला है चाहे स्वामी विवेकानंद हों या आधुनिक भारत के नवनिर्माण के शिल्पी नरेंद्र मोदी इसी देवभूमि ने उनको नई दिशा प्रदान की है. जोशी ने नियमित खान पान, संस्कृति संस्कारों के पालन के साथ साथ नियमित योग और ध्यान पर जोर दिया, कल सुबह 6 बजे से और 20 मार्च सुबह 7 से 9 बजे तक भी ध्यान पर आधारित डा0 जोशी के विशेष सत्र होंगे.  आज के कार्यक्रम में योगाचार्य रमेश शर्मा योग शिक्षक वीर केसरी चंद राजकीय महाविद्यालय डाकपत्थर देहरादून, फूल सिंह बिष्ट राजकीय महाविद्यालय लंबगांव टिहरी के योग श्रीकुमार मंगलम सेमवाल का विशेष सहयोग रहा।
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