ऋषिकेश :एस डी आर एफ (SDRF) टीम ढालवाला ने हरयाव (हरेला) पर्व पर किया बृक्षारोपण (Video)

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ऋषिकेश : आज टीम द्वारा आज हरयाव/हरेला पर्व पर सुबह से ही अपने कैम्प के आस पास बृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया, जिसमें कई फलदार व छायादार पेड़ लगाए गए। टीम में इंस्पेक्टर कवींद्र सजवाण, लाल सिंह, किशोर कुमार, सागर सिंह, मनमोहन सिंह, दीपक जोशी, सुमित, आदि थे.

क्या है हरयाव/हरेला ?
त्‍योहार के 9 दिन पहले ही 5 से 7 तरह के बीजों की बुआई की जाती है. इसमें मक्‍का, गेहूं, उड़द, सरसों और भट शामिल होते हैं. इसे टोकरी में बोया जाता है और 3 से 4 दिन बाद इनमें अंकुरण की शुरुआत हो जाती है. इसमें से निकलने वाले छोटे-छोटे पौधों को ही हरेला कहा जाता है. इन पौधों को देवताओं को अर्पित किया जाता है. घर के बुजुर्ग इसे काटते हैं और छोटे लोगों के कान और सिर पर इनके तिनकों को रखकर आशीर्वाद देते हैं. इस पर्व में लोग बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लेते हैं लेकिन नौकरी-पेशा करने वाले और घर से दूर रहने वालों को हरेला के तिनके भेजे जाते हैं. जिन्हें बड़ों का आशीर्वाद और ईष्टों की कृपा मानकर कान और सिर पर रखा जाता है.

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कब काटा जाता है हरयाव/हरेला-
उत्तराखंड में कुछ जगह हरेला बोने के 11वें दिन इसे काटते हैं, तो कुछ जगहों पर ये 10 वें दिन काटा जाता है. लोग अपने-अपने गांव की परम्परा के मुताबिक ही हरेला बोते और काटते हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड में हरेला दो अलग-अलग दिन बोया जाता है. हालांकि सभी लोग इसे संक्रांति के दिन ही काटते हैं.

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