ऋषिकेश के बापूग्राम भूमि विवाद मामले की आवाज उठाई संसद में महेंद्र भट्ट ने, जानें

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नई दिल्ली : संसद में आज राज्य सभा सांसद और उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष भाजपा महेंद्र भट्ट ने ऋषिकेश में लोगों के आशियाने बचाने को लेकर मामला उठाया. मांग की इन इलाकों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाये. लोगों का ऋषिकेश के बापूग्राम लगातार धरना जारी है. सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्यसभा में ऋषिकेश के बापूग्राम और मीरानगर क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग की…..VIDEO देखें —

नई दिल्ली / देहरादून: वन विभाग की जमीन में लोगो को बसने को लेकर जो मामला ऋषिकेश में चर्चा में है उसको लेकर सड़क से लेकर संसद तक गूँज सुनाई पड़ रही है. अब इसी कड़ी में ऋषिकेश निवासी और राज्य सभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काबिज महेंद्र भट्ट ने राज्य सभा में यह मामला उठाया है. उन्हूने इन इलाकों को राजस्व ग्राम घोषित करने की सरकार से मांग की है.  भट्ट ने संसद में शून्यकाल के दौरान स्थानीय लोगों के वैधानिक अधिकार और विकास की चिंताओं की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान आकृषित करने की कोशिश की. आपको बता दें, उन्होंने सरकार के संज्ञान में लाते हुए कहा, “राजस्व ग्राम घोषित न होने के कारण इन क्षेत्रों के नागरिकों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जैसे भूमि स्वामित्व से संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं. इसी तरह, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रहा है.महेंद्र भट्ट, राज्यसभा सांसद-“

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आपको बता दें यहाँ पर न रजिस्ट्री है न खारिज दाखिल. ऐसे में भूमि खरीद फरोख्त स्टाम्प पेपर में हो रही है. जमीन के दाम आम आदमी से बाहर हो गए थे. प्रॉपर्टी डीलर हर गली कोने में अपनी दूकान खोल कर बैठे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करोड़ों की प्रॉपर्टी हजारों में खरीदने वाला नहीं मिल रहा है अब.कोर्ट ने भी खरीद फरोख्त, निर्माण पावंदी लगाई हुई है. वहीं इस तकनीकी दिक्कत के कारण वहां विकास कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं. उनके द्वारा सदन में बताया गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा इस विषय पर बार-बार अनुरोध किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उनके द्वारा सदन में बताया गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा इस विषय पर बार-बार अनुरोध किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.

राजनीतिक पंडितों की मानें तो,  सदन में भी तब उठा यह मुद्दा जब २ फ़रवरी को हजारों लोग सड़कों पर उतर आये और IDPL से तहसील तक पैदल मार्च करते हुए महिलायें, बुजुर्ग युवा सभी मौजूद थे. नेता, जन प्रतिनिधि भी थे लेकिन वे सेल्फी, फोटो विडियो तक सीमित दिखे. सबके चेहरे पर मुस्कान दिखी….और आँखों पर काले चश्मे…..मुंह में दांत दिखाते हुए हंसी. गंभीरता नहीं दिखी. वहीँ आम जन हैरान  परेशान दिखा.

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राजनीतिक पंडितों की मानें तो, उनका कहना है,  अब नेताओं ने सोचा आने वाले समय में चुनाव है और कहीं मामला उल्टा न पड़ जाए. इसलिए सत्तापक्ष अब बैक दूर से धीर धीरे एक्टिव होने लगने की कोशिश कर रहा है. यह उसी का नतीजा है. महेंद्र भट्ट खुद ऋषिकेश के रहने वाले हैं. उनको स्थित का अच्छी तरह जानकारी है. अब देखने होगा कितना सफल होते हैं इस मामले में.  फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है. देखना होगा आगे की तारीखों में कोर्ट क्या रुख लेता है….लेकिन आम जन परेशान जरुर है अपना आशियाना बचाने के लिए. दूसरी तरफ तथाकथित भू माफिया….जिनको टेंशन हो रही है हमारी रोजी रोटी गयी करके.

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