देहरादून : वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला की पत्नी रीता खनका रौतेला के निधन पर सीएम धामी ने शोक ब्यक्त किया, ऋषिकेश प्रेस क्लब ने भी दी श्रद्धांजलि

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी स्थित वरिष्ठ पत्रकार जगनमोहन रौतेला की धर्मपत्नी के निधन पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवारजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है।  वहीँ  ऋषिकेश में भी  प्रेस क्लब में रीता खनका रौतेला को दी गयी श्रद्धांजलि.

ऋषिकेश प्रेस क्लब ने वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला की पत्नी रीता खनका रौतेला के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.शनिवार को ऋषिकेश प्रेस क्लब सभागार में आयोजित बैठक में ऋषिकेश के पत्रकारों ने रीता खनका रौतेला के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। प्रेस क्लब के अध्यक्ष आशीष डोभाल ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला की पत्नी रीता खनका रौतेला स्वयं एक समाजिक सरोकारों से जुड़ी पत्रकार व लेखिका थी। लंबी बीमारी के दौरान भी उन्होंने अपना लेखन और सामाजिक दायित्वों को बखूबी निभाया। मृत्यु से कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने जिस तरह एक असाध्य बीमारी से लड़ते हुए मार्मिक पोस्ट लिखकर अपनी देह दान का फैसला लिया, वह उनकी जीवटता को दर्शाता है। इस अवसर पर पत्रकारों ने उनके परिवारजनों के प्रति संवेदना व्यक्त कर उनकी आत्मशांति के लिए प्रार्थना की। आपको बता दें जगमोहन रौतेला हल्द्वानी में रहते हैं.मूल रूप से बागेश्वर जिले के प्रतिष्ठित गांव नरगोली के रहने वाले हैं जगमोहन. जो ब्लॉक काण्डा-कमश्यार क्षेत्र में पड़ता है। उनकी एक बेटी है जो स्कूल की छात्रा है. ऋषिकेश प्रेस क्लब के महासचिव दुर्गा नौटियाल, संरक्षक अनिल शर्मा, विक्रम सिंह, हरीश तिवारी, प्रबोध उनियाल, सुदीप पंचभैया, मनोहन काला, जितेंद्र चमोली, राजेश शर्मा, राजीव खत्री, आलोक पंवार, गणेश रयाल, बसंत कश्यप, मनोज रौतेला आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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बीमारी से कितना पीड़ित थी रीता और उनकी पीड़ा उनके इस पोस्ट से सामने दिख रही थी. आपको बता दें, रीता ने 21 मई को मार्मिक पोस्ट अपने फेसबुक वाल पर डाली थी, उसी पोस्ट को आप भी पढ़ सकते हैं यहाँ पर –

*** अब मेरी देह से मुक्ति की प्रार्थना करें, ताकि गहरी पीड़ा से छुटकारा मिले ***
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पिछले लगभग ढाई साल से मेरे कैंसर से बीमार होने के बाद से सैकड़ों शुभचिंतकों, मित्रों और परिजनों ने मेरे स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करने के साथ ही मेरे जल्दी स्वस्थ्य होने की हजारों बार प्रार्थनाएं की हैं. मेरे व मेरे परिवार का बीमारी से लड़ने के लिए हौसला बढ़ाया है. इस सब के लिए मैं व मेरा परिवार हमेशा आप लोगों का ऋणी रहेगा.

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अब मेरी बीमारी ऐसी स्थिति में पहुँच गई है कि जहॉ से आगे के जीवन की कोई उम्मीद नहीं है. लोग मौत से संघर्ष करते हैं, पर मैं जीवन से संघर्ष कर रही हूँ. मुझे जीवन के सॉसों की आवश्यकता नहीं, बल्कि मौत का आलिंगन चाहिए, ताकि गहरी पीड़ा और वेदना से जल्द से जल्द मुक्त हो सकूँ. किसी भी प्राणी के जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु का आलिंगन ही है. और इसे मैं और मेरा परिवार पूरी सत्यता से स्वीकार करते हैं. ऐसे में मेरी यह देह सॉसों से मुक्त हो जाती है तो बुलबुल और उसके बौज्यू को मेरी मुक्ति का दुख तो होगा, पर वे इस दुख की पीड़ा को स्वीकार करेंगे. जब मैं मौत का आलिंगन चाह रही हूँ तो मैंने अपनी देह को निर्जीव होने के बाद सात कुन्तल लकड़ी को समर्पित करने की बजाय, यही मेडिकल कॉलेज को देने का निर्णय भी कल 20 मई 2023 को कर लिया है. यह निर्णय तो हम दोनों ने बहुत पहले कर लिया था, पर कागजी औपचारिकताओं को पूरा नहीं कर पाए थे. कल 20 मई शनिवार को वह औपचारिकता भी पूरी कर ली है. मेडिकल कॉलेज प्रशासन, जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी इस बारे में औपचारिकता संकल्प पत्र सौंप दिया है. मेरे इस संकल्प को पूरा करने में मेडिकल कॉलेज में अध्यापक व मेरी ननद डॉ. दीपा चुफाल देउपा, देवर अंकुश रौतेला, बुलबुल के बौज्यू, देवर के मित्र ललित मोहन लोहनी और ननद के ही विभाग के दीप चन्द्र भट्ट का सहयोग रहा है. मैं इन सब के प्रति भी आभार व्यक्त करती हूँ.

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मैं अब अपनी देह से जल्दी मुक्ति इस वजह से भी चाहती हूँ कि ताकि उसके बाद मेरे बैड पर आईसीयू में वह मरीज आए, जिसे जीवन के सॉसों की बहुत आवश्यकता है. मेरे जीवन का अब कोई मतलब नहीं रह गया है. शादी के बाद मैंने अपनी भरपूर जिंदगी जी है. मेरे लिखना, पढ़ना और तर्क करना सीखा. सबसे बड़ी बात कि मैंने धारा प्रवाह कुमाउनी भी शादी के बाद ही सासू ईजा और बुलबुल के बौज्यू के प्रेरित करने पर ही सीखी. अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मैं इस बात को मानती हूँ. अपने कुमाउनी लोकजीवन के तीज-त्योहारों को मनाना और लोक की परम्परा का पालन करना भी मैंने शादी के बाद ही सीखा. मैं आज आईसीयू के बैड में इस स्थिति में नहीं हूँ कि खुद कुछ लिख सकूँ. यह पोस्ट मैं बुलबुल के बौज्यू से लिखवा रही हूँ. इसमें हो सकता है कि इस पोस्ट के शब्द हूबहू मेरे न हों, भावनाओं के शब्द पूरी तरह मेरे हैं.bमैं अंत में एक बार फिर से आप सब से अपनी इस देह से जल्द से जल्द मुक्ति में सहयोग चाहती हूँ. आप सब से मेरी प्रार्थना है कि अपने-अपने देवी-देवताओं, ईष्ट देवों से कहें कि मुझे इस नश्वर देह से मुक्त करें. आप सब ने पिछले ढाई साल में मेरे जीवन के लिए कामना की, अब आखिरी वक्त में देह से मुक्ति की प्रार्थना में बिना झिझक सहयोग करें. आप सब का प्यार, सहयोग मेरी बिटिया बुलबुल और उसके बौज्यू को आत्मबल ही देगा. आप सब लोगों का जीवन आयोग्यमयी, प्रेम, प्यार व सहयोग से भरपूर रहे, यही कामना मेरी ओर से है.

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