ऋषिकेश : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग की टीम पहुंची सर्वे के लिए, लोगों ने किया विरोध

20 बीघा ढलान व अन्य इलाके में शनिवार को लोगों ने बल्लियाँ और पथ्हर लगा कर वन विभाग की टीम को रोका एंट्री करने से

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  • वन विभाग की टीम  खाली पड़े प्लॉट पर कब्जा लेने पहुंची थी
  • पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला दिया
  • वन विभाग की टीम, लोगों ने किया विरोध, शुक्रवार से लेकर शनिवार तक रहा विरोध 
  • ऋषिकेश में शनिवार को जमकर हंगामा हुआ
  • बापू ग्राम, सुमन विहार, मीरा नगर, शिवाजी नगर, २० बीघा  में लोगों रहे तनाव में 
  • 20 बीघा ढलान व अन्य इलाके में शनिवार को लोगों ने बल्लियाँ और पथ्हर लगा कर वन विभाग की टीम को रोका एंट्री करने से

ऋषिकेश : शुक्रवार को वन विभाग की टीम पहुंची बापू ग्राम इलाके में. खाली पड़े भू खण्डों को कब्जे में लेने. ऐसे में लोगों को जैसे ही पता लगा विरोध में एकत्रित हो गए. वन विभाग की टीम को वापस लौटना पडा. लेकिन लोग पानी की टैंकी के पास एकत्रित हो गए. इस दौरान लोग तनाव में दिखे. साथ ही गुस्से में भी वे बार बार स्थानीय प्रतिनिधि और सरकार को कोश रहे थे. आंखिर आज तक उन्हें मालिकाना हक़ क्योँ नहीं दिला पाए. क्या कर रहे थे जन प्रतिनिधी क्या कर रही थी सरकारें ? आपको बता दें, यह जमीन लीज की जमीन है और वन विभाग अपना दावा कर रहा है. जबकि अब यहाँ पर लाखों लोग बस चुके हैं. झुग्गी  से लेकर कोठियां तक बन चुकी हैं. 20 बीघा ढलान व अन्य इलाके में शनिवार को लोगों ने बल्लियाँ और पथ्हर लगा कर वन विभाग की क्षेत्र में  टीम को रोका एंट्री करने से…लोगों का विरोध साफ़ दिखाई दे रहा था.

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अब शनिवार को फिर से  सुमन विहार अमित ग्राम शिवाजी नगर मीरा नगर  क्षेत्र में खाली पड़े प्लॉटों का चिह्नीकरण के लिए वन विभाग के टीम फोर्स के साथ मौके पर पहुंची थी.  बाबूग्राम पंचायत घर के बाहर से लोगों ने टीम को लौटा दिया. उसके बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों से सवाल जवाब किया.  सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शनिवार 27 दिसंबर को ऋषिकेश के शिवाजी नगर, मीरा नगर, बापू ग्राम, मनसा देवी और गुमानीवाला में वन विभाग जमीन की नपाई शुरू करने पहुंचा. वन विभाग की इस कार्रवाई स्थानीय लोगों ने काफी विरोध किया.बताया जा रहा है कि लोगों ने वन विभाग की टीम को शिवाजी नगर में घुसने से भी रोका. स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ करीब तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी लोगों को समझाते रहे, लेकिन कोई भी उनकी सुनने को तैयार नहीं था. आखिर में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद ही वन विभाग की टीम पुलिस के साथ शिवाजी नगर में घुसी. पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला दिया और लोगों को बताया कि घरों को किसी प्रकार से नुकसान नहीं होगा. खाली पड़ी जमीन को ही वन विभाग की टीम नपाई के साथ चिन्हिंत करेगी. क्षेत्रीय लोग पैनिक न हो किसी का भी घर नहीं उजाड़ा जाएगा.स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि कल भी जंगलात की टीम ने पूरी फोर्स के साथ बापू नगर में एट्री की थी. जब इस बारे में वन विभाग की टीम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बापू ग्राम की 500 एकड़ जमीन पर जितने भी भूखंड है, उनका नापजोप करें.
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स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक जब अधिकारियों से वेकेंट लैंड के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि जो मकान बने हुए है, उन्हें छोड़कर खाली पड़ी जमीन, जिसमें दो से तीन सौं गज के जो भी प्लाट होंगे, उसकी वो नाप लेगे, जिसका स्थानीय जनता ने विरोध किया. क्योंकि वो यहां तीन पीढ़ियों से रह रहे है. इसके लिए सरकार जिम्मेदार है. वन विभाग की इस कार्रवाई से इलाके में डर का माहौल है.स्थानीय जनता का साफ कहना है कि वो वन विभाग की किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ने देंगे. वो अहिंसावादी तरीके से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध करेंगे. वहीं हंगामा बढ़ने पर ऋषिकेश मेयर शंभू पासवान भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश हुआ था. इसके बाद ही वन विभाग यहां पहुंचा था.

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मेयर शंभू पासवान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि मकानों को छोड़कर जो जमीन खाली है, उस पर वन विभाग अपने बोर्ड लगाए. इसके बाद आनन-फानन में वन विभाग और शहरी विकास सचिव की तरफ से एक समिति का गठन हुआ. इसीलिए लोगों को पहले से कोई नोटिस नहीं मिला. इसी कारण लोगों को कोई जानकारी भी नहीं मिल पाई. इसी वजह से इलाके में रहने वाली 1.50 से दो लाख की आबादी डरी हुई है. अब खाली पड़े भू खण्डों को लोग कुछ न कुछ निर्माण कर छप्पर डालने में लगे हुए हैं. ताकि  खाली भू खंड न रहे. वन विभाग व् अन्य विभागों के पास ड्रोन, सैटेलाईट की तस्वीरें पहले से मौजूद हैं. तो अब क्या फायदा निर्माण करने का.

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