यूपी : अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठन हुए एकजुट..जानिये

- टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों का संयुक्त आंदोलन घोषित
दीपांकुश चित्रांश की रिपोर्ट…खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से है जहाँ वर्ष 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। विभिन्न राज्यों में अलग- अलग नीतियों और केंद्र सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट एवं सकारात्मक आश्वासन न मिलने से शिक्षकों में व्यापक आक्रोश और चिंता व्याप्त है। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षकों के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए देश के विभिन्न मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों ने संयुक्त रूप से टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया है। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता प्रकरण के विरोध में प्रदेश के सभी प्रमुख शिक्षक संगठन इस मंच पर एकजुट हो गए हैं। प्रदेश संगठन के निर्देश पर मंगलवार को सुल्तानपुर जिले में डाकखाना स्थित उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ कैंप कार्यालय पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी मान्यता प्राप्त संगठन ने संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

आपको बताते चलें कि जूनियर शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि अब शिक्षकों को गुमराह नहीं किया जा सकता,अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सभी मान्यता प्राप्त संगठन एकजुट हो चुके हैं। वहीं प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि सभी संगठनों का एक मंच पर आना शिक्षक हितों के लिए दूरगामी कदम है,जिससे जनपद के शिक्षक आशान्वित हैं। जनपदीय प्रवक्ता निजाम खान ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने एकमत होकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय कर प्रमुख निर्णय लिए गए हैँ,आने वाली 22 फरवरी 2026 दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक एक्स (ट्विटर) पर हैशटैग अभियान व 23–25 फरवरी 2026 तक सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे,26 फरवरी 2026 को स्थानीय तिकोनिया पार्क पर धरना और शाम 4 बजे जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। मार्च 2026 नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल महारैली आयोजित कर केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया जाएगा। शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित निर्णय शिक्षकों के हित में नहीं है, इसलिए सभी संगठन मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेंगे।



