UK : अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन, 2026 का छटवां दिन, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की उपस्थिति रही

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  • भारत  की सनातन योगिक विरासत को नमन
  • पूज्य साध्वी भगवती  के जन्मदिवस उत्सव
  • राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह  की गरिमामयी उपस्थिति के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव अपने समापन की ओर 11 देशों के राजनयिकों, जिनमें कई राजदूत और उच्चायुक्त शामिल थे, की उपस्थिति में यह महोत्सव सम्पन्न की ओर बढ़ रहा है। इस उत्सव में विश्व के 80 से अधिक देशों से आए प्रतिभागियों ने योग, एकता और वैश्विक कल्याण के साझा संकल्प का उत्सव मना रहे है
ऋषिकेश:  पवित्र गंगाजी के तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का छठा दिन लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक प्रतिभागियों के साथ अत्यंत प्रेरणादायी और ऐतिहासिक रहा। यह दिन भारत की सनातन योग परंपरा को सम्मान देने और योग की प्रामाणिक परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए समर्पित रहा।परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती  और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती  के दिव्य नेतृत्व में तथा भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस दिवस का मुख्य आकर्षण “भारत, सनातन योग, परंपरा के संरक्षण और विरासत का संरक्षण” विषय पर आयोजित विशेष प्लेनरी सत्र रहा। इस सत्र में विश्व के प्रमुख विद्वानों और योग साधकों ने भाग लिया और तीव्र गति से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में योग की गहराई और प्रामाणिकता को सुरक्षित रखने पर विचार साझा किए।
महोत्सव की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब 11 देशों के राजनयिकों, जिनमें कई राजदूत और उच्चायुक्त शामिल थे, उन्होंने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को गौरवान्वित किया। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि वैश्विक एकता और सामूहिक कल्याण का सेतु है।इस दिन का एक और विशेष आकर्षण पूज्य साध्वी  के 54वें जन्मदिवस का उल्लासपूर्ण उत्सव रहा। साथ ही महोत्सव का समापन समारोह माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह  की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जो इस अद्भुत अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को प्रेरणादायी और आध्यात्मिक समापन प्रदान करेगा।
प्रातःकाल में प्रतिभागियों ने परमार्थ निकेतन के विशेष पवित्र अग्नि यज्ञ एवं हवन में भाग लिया, जिसका नेतृत्व पूज्य स्वामी और पूज्य साध्वी  ने किया। इस यज्ञ के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में शांति, स्वास्थ्य और सामंजस्य की प्रार्थना की गई। इसी अवसर पर वैश्विक योग परिवार ने हर्षोल्लास के साथ पूज्य साध्वी  के जन्मोत्सव समारोह की शुरुआत की।इस पावन अवसर पर वक्ताओं और साधकों ने पूज्य साध्वी  के उस अद्वितीय योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिसके माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ है। साथ ही उन्होंने सनातन धर्म और योग की शिक्षाओं को विश्वभर के समुदायों तक पहुँचाने के लिए विलक्षण कार्य किये।
विजडम टॉक्स आध्यात्मिक प्लेनरी, योग की सनातन विरासत का उत्सव-छठे दिन का मुख्य आकर्षण “भारत योग की सनातन भूमि  परंपरा के संरक्षण और विरासत का संरक्षण” विषय पर आयोजित आध्यात्मिक प्लेनरी सत्र रहा। इस सत्र में प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए, जिनमें शामिल थे-डॉ. एच. आर. नागेन्द्र, डॉ. आनंद बालयोगी भावनानी, डॉ. क्रिस्टोफर की चैपल, डॉ. गणेश राव, डॉ. रुचि गुलाटी तथा इस ंूेसत्र का संचालन परमार्थ निकेतन की वरिष्ठ योगाचार्या गंगा नंदिनी ने किया।. गणेश राव ने कहा कि भारत शब्द का अर्थ है सत्य और ज्ञान की खोज करने वाला। योग की विरासत हजारों वर्षों से ऋषियों, मुनियों और वेदों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती आई है। परंपरा ही वह माध्यम है जो इस विरासत की रक्षा करती है।डॉ. क्रिस्टोफर चैपल ने कहा कि योग हमें अपने भीतर उस दिव्य चेतना से जोड़ता है जो परिस्थितियों और समय से परे है।डॉ. रुचि गुलाटी ने शिव और शक्ति के उदाहरण से समझाया कि आध्यात्मिक शक्ति साधना से विकसित होती है और यह हमें भीतर और बाहर के अंधकार को समाप्त करने की शक्ति देती है।
डॉ. आनंद बालयोगी भावनानी ने जीवन में संतुलन और त्याग की भावना पर बल देते हुए कहा कि जितना अधिक हम पकड़ने की कोशिश करते हैं, उतना ही कम प्राप्त होता है।डॉ. एच. आर. नागेन्द्र ने योग और विज्ञान के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभव और परीक्षण दोनों को महत्व देती है। उन्होंने दान, दया और इंद्रिय नियंत्रण को जीवन के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।प्रातःकालीन साधना और योग अभ्यास के सत्रों में हठ योग, कुंडलिनी योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और पंचकोश संतुलन जैसे अनेक अभ्यास कराए गए, जिनका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जागृत करना था।दोपहर और संध्या के सत्र-दोपहर में आयुर्वेद, योग दर्शन, ध्वनि चिकित्सा, ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े अनेक सत्र आयोजित किए गए।
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