UK : देवभूमि की वादियों में समर्पणानन्द महाराज की कठिन “पंचाग्नि साधना” हुई शुरू, 25 मई तक चलेगी
हाड़ कंपाती ठण्ड से लेकर प्रचंड गर्मी के बीच साधनारत रहते हैं तपस्वी महाराज जी

- स्वामी समर्पणानन्द महाराज की साधना शुरू करने का मुहूर्त 15 जनवरी 2026 से 25 मई 2026 तक है
- पंचाग्नि साधना प्राचीन योगिक परंपरा में वर्णित सबसे तीव्र और कठोर योगिक अभ्यासों में से एक है
- तपोवन स्थित विश्व प्रसिद्द आश्रम में हो रही है कठिन साधना, मौन रह कर की जाती है साधना
- देश विदेश से पहुँचने लगे हैं आज से भक्त, साधक, दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए
- अभी कुछ समय पहले स्वामी जी UNO (अमेरिका) भी गए थे संबोधन के लिए, उसके बाद यूरोप यात्रा से लौटे हैं आश्रम
- भारत के प्रसिद्द संतों में हैं शुमार महाराजश्री का नाम, ऐसी साधना करने वाले बहुत कम संत हैं आज के समय में
- महाराजश्री सरल, सिद्धस्त, सहयोग और दयालु रूपी संत हैं, जिनसे मिलकर हर कोई कृतार्थ होता है

ऋषिकेश : (मनोज रौतेला) उत्तराखंड की तपोभूमि एक से एक तपस्वी हुए हैं और आज भी कई साधक, संत तपस्या में लीन हैं…कोई हिमालय में माइनस डिग्री तापमान में तपस्या कर रहा है तो कोई इस हाड़ कंपाती सर्दी में तपस्या में लीन है. उनमें से एक तपस्वी भी आज से साधना में साधनारत हैं….उनका नाम है तस्पस्वी स्वामी समर्पणानन्द महाराज !! गंगा किनारे स्थित तीर्थनगरी ऋषिकेश के पास तपोवन स्थित आश्रम में विश्व प्रसिद्द संत स्वामी समर्पणानन्द महाराज की पंचाग्नि साधना शुरू हो गयी है. यह बेहद कठिन साधना मानी जाती है. साधना शुरू करने का मुहूर्त 15 जनवरी 2026 से 25 मई 2026 तक चलेगी. विश्व प्रसिद्द स्वामी जी की इस साधना का हर किसी को इन्तजार रहता है. इस दौरान भक्त, साधक उनसे आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं. स्वामी जी किसी से इस दौरान बात नहीं करते हैं. मौन व्रत पर रहते हैं. केवल संकेतों से वार्तालाप करते हैं. ऋषिकेश के पास तपोवन स्थित आश्रम में यह कठोर साधना स्वामी जी कर रहे हैं.

- साधना क्षेत्र में प्रवेश केवल उन्हीं लोगों को है जो पूर्ण मौन का पालन करते हैं
- कम से कम तीन दिनों के लिए लगातार आश्रम में रहते हैं
- इस अवधि के दौरान आश्रम से बाहर नहीं जाते हैं
- दर्शन और आशीष लगातार मिलता है
- भक्त आशीष लेने के लिए साधना क्षेत्र के बाहर से चुपचाप देख सकते हैं
- पूर्ण मौन अनिवार्य है साधना के समय
- आश्रम में रहने और आशीष लेने के इच्छुक भक्तों का स्वागत है
- देश विदश से भक्त इस दौरान आश्रम पहुँचते हैं दर्शन, आशीष के लिए
- कृपया ध्यान दें-
- फोटो लेना वर्जित है
- वीडियो रिकॉर्डिंग वर्जित है
- ऑडियो रिकॉर्डिंग वर्जित है
- सोशल मीडिया पोस्ट वर्जित हैं
- आश्रम अनुशासन– आश्रम में रहने वाले सभी लोगों के लिए, चाहे साधना, सेवा, दर्शन या बोर्डिंग के लिए, निम्नलिखित नियम पूरी अवधि के लिए बिना किसी अपवाद के लागू होते हैं।
- कोई मांस नहीं
- कोई शराब नहीं
- कोई ड्रग्स नहीं
- कोई धूम्रपान नहीं……ये नियम सभी समय पर लागू होते हैं, यहां तक कि अस्थायी रूप से आश्रम परिसर से बाहर जाने पर भी। प्रतिबंधित वस्तुओं का सेवन करने के लिए आश्रम छोड़ना और वापस आना अनुमति नहीं है। आश्रम में रहना आश्रम अनुशासन और आध्यात्मिक आचार संहिता की पूर्ण स्वीकृति को दर्शाता है। सेवा और दान यह दुर्लभ और अत्यधिक उन्नत पंचाग्नि साधना पूरे विश्व के कल्याण और वैश्विक शांति के लिए की जा रही है। साधना के लिए निरंतर घी और अन्य पवित्र यज्ञ सामग्री की आवश्यकता होती है। इस पवित्र प्रयास का समर्थन करना सार्वभौमिक कल्याण के लिए समर्पित एक शक्तिशाली और दुर्लभ योगिक अभ्यास में योगदान करके आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त करने का एक सुंदर अवसर है। जो लोग सेवा करना चाहते हैं या इस पवित्र कारण के लिए दान देना चाहते हैं. यह वेबसाईट लिंक है … www .samarpanayoga.com आपका सहयोग और समर्थन. इस दुर्लभ और पवित्र साधना की आध्यात्मिक शक्ति, शुद्धता और पवित्रता को संरक्षित करने में मदद करता है। हम आपके समझ, अनुशासन और आदर के लिए धन्यवाद देते हैं।



