UK : श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर में “भारत बौद्धिक्स” राष्ट्रीय परीक्षा का सफल आयोजन, 300 विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

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ऋषिकेश :  श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पण्डित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा प्रायोजित भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित “भारत बौद्धिक्स” राष्ट्रीय परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस परीक्षा में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से लगभग 300 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक पंजीकरण कर सहभागिता निभाई।
परीक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भारतीय दर्शन, विज्ञान, संस्कृति, साहित्य एवं नवाचार की गहरी समझ विकसित करना रहा। परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं में विशेष उत्सुकता देखने को मिली तथा परीक्षा केंद्र पर उनकी सक्रिय और अनुशासित उपस्थिति रही।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने परीक्षा के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “भारतीय ज्ञान परम्परा हमारी सभ्यता की अमूल्य बौद्धिक धरोहर है। इस प्रकार की परीक्षाएँ विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित करने का अवसर प्रदान करती हैं। विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करता रहेगा।”परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत ने कहा कि “हमारे परिसर के 300 विद्यार्थियों ने इस राष्ट्रीय परीक्षा में भाग लेकर यह सिद्ध किया है कि युवा पीढ़ी भारतीय ज्ञान परम्परा को समझने और अपनाने के लिए तत्पर है।”
परीक्षा प्रभारी प्रो. धर्मेंद्र तिवारी ने जानकारी दी कि परीक्षा अत्यंत सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। सभी विद्यार्थी समय से पहले परीक्षा केंद्र पर उपस्थित हुए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई।परीक्षा के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने बताया कि “भारत बौद्धिक्स परीक्षा, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। इससे छात्र समुदाय में सांस्कृतिक एवं बौद्धिक चेतना का विकास होगा।”उन्होंने इस अवसर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के प्रान्त अध्यक्ष प्रो. जगमोहन सिंह राणा, प्रान्त मंत्री डॉ. राजकुमारी भण्डारी, कोषाध्यक्ष डॉ. अनिल सिंह तोमर सहित सभी पदाधिकारियों व सहयोगियों का विश्वविद्यालय की ओर से आभार व्यक्त किया।परीक्षा में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को
प्रथम पुरस्कार ₹1,00,000,
द्वितीय पुरस्कार (2 प्रतिभागियों को) ₹50,000,
तृतीय पुरस्कार (4 प्रतिभागियों को) ₹25,000,
एवं कई सांत्वना पुरस्कार ₹2,500 प्रदान किए जाएंगे।
परीक्षा के पर्यवेक्षक के रूप में सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य उमाकान्त पन्त विद्या भारती प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करने के पश्चात कहा कि “यह परीक्षा अत्यंत पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित की गई। विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति जो उत्साह देखने को मिला, वह उच्च शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।”इस अवसर पर प्रो. सुरमान आर्य, नरेन्द्र खुराना, रामगोपाल रतूड़ी सहित अनेक प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “इस प्रकार की परीक्षाएँ हमें रामायण, महाभारत, गुरुग्रंथ साहिब तथा आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ती हैं और हमारे व्यक्तित्व व सोच को समृद्ध बनाती हैं।”समग्र रूप से यह आयोजन विश्वविद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय ज्ञान की समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ।
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