UK : हरीश रावत का नाम उत्तराखंड के विकास के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है : मोहित उनियाल

Ad Ad Ad
ख़बर शेयर करें -
देहरादून  : हरीश रावत के 15 दिन का  अवकास लेने  के बीच उनसे प्रदेश भर से नेता मिलने पहुँच रहे हैं. अगले वर्ष होने वाले  विधानसभा    चुनाव से पहले रावत के इस कदम से पार्टी में खेमेबाजी सामने आ गयी है. उसी कड़ी में युवा कांग्रेस नेता मोहित उनियाल भी उनसे मिलने पहुंचे थे.   परवादून देहरादून कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल ने अस्थाई राजधानी देहरादून में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात की. इस अवसर पर मोहित उनियाल ने उन्हें भारतीय संविधान की प्रस्तावना भेंट की. साथ ही उनकी तारीफ में  कहा उन जैसा ब्यक्ति जिसका नाम उत्तराखंड के विकास के इतिहास में आज  स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.
———————————————–
मोहित उनियाल ने कहा, “आज पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय Harish Rawat जी से देहरादून स्थित उनके निवास पर मुलाकात कर #भारतीय_संविधान की #प्रस्तावना भेंट की। यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति, विकास और “उत्तराखंडियत” की भावना को करीब से महसूस करने का अवसर भी था।श्री हरीश रावत जी का नाम उत्तराखंड के विकास के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने न केवल प्रशासनिक दृष्टि से राज्य को दिशा दी, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी नेतृत्व का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण का जो ऐतिहासिक कार्य उनके नेतृत्व में हुआ, वह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प और पुनर्जीवन की कहानी है।उनके कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत सस्ती दरों पर राशन वितरण,“मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना” के माध्यम से युवाओं को रोजगार,महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर आर्थिक सशक्तिकरण,पर्यटन और तीर्थाटन विकास के जरिए स्थानीय रोजगार बढ़ाना व अन्य ऐतिहासिक योजनाओं ने उत्तराखंड के समग्र विकास को नई दिशा दी। इन पहलों ने न केवल आर्थिक मजबूती को बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाते हुए राज्य में संतुलित और समावेशी विकास की नींव रखी।
राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2002 भी बेहद महत्वपूर्ण रहा, जब उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाने में हरीश रावत जी की भूमिका निर्णायक रही। उस दौर में उनका संगठनात्मक कौशल और रणनीतिक सोच स्पष्ट रूप से सामने आई।संगठनात्मक दृष्टि से रावत जी की पकड़ बेहद मजबूत रही है। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के “मार्गदर्शक” हैं। छोटे से छोटे कार्यकर्ता से उनका सीधा संवाद, उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें महत्व देना,यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि संगठन में आज भी उनकी गहरी स्वीकार्यता है।उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों – चाहे वह मंडुवा, झंगोरा,काफल,माल्टा हो या पहाड़ी दालें,को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने “स्थानीय को वैश्विक पहचान” देने का जो प्रयास किया, उसने पहाड़ की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।लेकिन इन सब उपलब्धियों से ऊपर जो बात उन्हें विशिष्ट बनाती है, वह है उनका सरल स्वभाव और जनता से गहरा जुड़ाव। वे केवल सत्ता के नेता नहीं, बल्कि जनभावनाओं के प्रतिनिधि हैं। उनकी “उत्तराखंडियत” की सोच में पहाड़ की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और स्वाभिमान समाहित है.
ALSO READ:  UK : गजब हाल है....तीर्थनगरी में HOME डिलीवरी करने वाला शराब तस्कर आबकारी ने दबोचा

Related Articles

हिन्दी English