सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद, यूपी के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी

- भारत में एक्टिव यूथेनेशिया अभी भी प्रतिबंधित है
नई दिल्ली : देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद, यूपी के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी है. ये देश का पहला मामला है, जब इच्छा मृत्यु की इजाजत SC से मिली है।हरीश साल 2003 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र थे और ऊंचाई से गिरने के बाद वो कभी होश में नहीं आ सके। हरीश पिछले 13 साल से अपने कमरे में मृत समान बिस्तर पर पड़े हैं। फैमिली वाले उनके इलाज में कंगाल हो चुके हैं। उनके उठ पाने की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं। जिसके बाद फैमिली ने हरीश के लिए SC से इच्छामृत्यु मांगी थी।पैसिव यूथेनेशिया ? पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है किसी मरीज को जीवन बचाने के लिए दी जा रही दवाएं, उपचार या लाइफ सपोर्ट सिस्टम को रोक देना या हटा लेना, ताकि उसकी प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सके.——————————————–
कौन हैं हरीश राणा?
हरीश राणा मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले हैं. साल 2013 में वह पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र थे. उसी दौरान वह एक पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हो गई. हादसे के बाद डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा और तब से वह लगातार बिस्तर पर हैं. हादसे के बाद हरीश राणा परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में चले गए. वह पिछले 13 वर्षों से शत-प्रतिशत विकलांगता और क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों के लकवे) से जूझ रहे थे. सांस लेने के लिए उन्हें ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब और भोजन के लिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब के सहारे रहना पड़ रहा था. उनकी दैनिक देखभाल पूरी तरह मशीनों और चिकित्सा सहायता पर निर्भर थी. डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी व्यक्ति का जीवन केवल कृत्रिम साधनों के सहारे खींचा जा रहा हो और उसके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो, तो उसे गरिमा के साथ मृत्यु चुनने का अधिकार है. अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में जीवन को लाइफ सपोर्ट सिस्टम के जरिए बनाए रखना व्यक्ति की गरिमा के खिलाफ हो सकता है.क्या है पैसिव यूथेनेशिया?
कानूनी भाषा में पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है किसी मरीज को जीवन बचाने के लिए दी जा रही दवाएं, उपचार या लाइफ सपोर्ट सिस्टम को रोक देना या हटा लेना, ताकि उसकी प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सके. यह एक्टिव यूथेनेशिया से अलग है, जिसमें किसी इंजेक्शन या दवा के जरिए जानबूझकर मृत्यु दी जाती है. भारत में एक्टिव यूथेनेशिया अभी भी प्रतिबंधित है.कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हरीश राणा कभी 20 साल का होनहार छात्र था, लेकिन चौथी मंजिल से गिरने के बाद उसे गंभीर ब्रेन इंजरी हुई और वह लगातार वेजिटेटिव स्टेट में है. मेडिकल रिपोर्ट में 13 साल के दौरान किसी तरह के सुधार के संकेत नहीं मिले. ऐसे में उसकी स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया.



