श्री बदरीनाथ धाम यात्रा 2026… नरेंद्र नगर राजदरबार में विधि विधान से निकाला गया तिल का तेल, गाडू घड़ा ऋषिकेश पहुंचा

- महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह, बेटी क्षीर्या कुमारी देवी और उनकी बेटी आहाना ने निकाला तिल का तेल
- तीन पीढ़ी एक साथ थी आज, इस भव्य और पारंपरिक धार्मिक आयोजन पर
- श्री बदरीनाथ धाम यात्रा 2026… नरेंद्र नगर राजदरबार से आज 7 अप्रैल रात्रि को ऋषिकेश पहुंचेगी गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा
- 23 अप्रैल को खुलेंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट
- तिलों के तेल से कपाट खुलने के दौरान भगवान बदरीविशाल का अभिषेक किया जाता है
- हालाँकि, सुबह मौसम साफ नहीं था, हल्की फुल्की बारिश की बूंद गिर रही थी, लेकिन भगवान बद्री विशाल की कृपा से कुछ समय बाद धूप निकाल आयी

ऋषिकेश: श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत तथा श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में आज मंगलवार 7 अप्रैल को गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा रात्रि विश्राम हेतु मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला ऋषिकेश पहुंची. उल्लेखनीय है कि आज प्रातः डिमरी धार्मिक पंचायत के पदाधिकारीगण टिहरी राज दरबार नरेंद्र नगर पहुंचे. जहां महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की अगुवाई में उनकी बेटी क्षीर्या कुमारी देवी और उनकी बेटी आहाना यानी महारानी राज्य लक्ष्मी शाह की नातिनी सहित सुहागिन महिलाओं ने तिलों पिरोकर तेल का कलश श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत को सौंपा। उल्लेखनीय है कि आज मंगलवार 7 अप्रैल राजदरबार नरेंद्र नगर से महाराजा मनुजयेंद्र शाह ने श्री बदरीनाथ गाडूघड़ा तेल कलश यात्रा का शुभारंभ किया. इन्हीं तिलों के तेल से कपाट खुलने के दौरान भगवान बदरीविशाल का अभिषेक किया जाता है।
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पवित्रता का विशेष ध्यान रखना होता है इसमें, यह निजी पूजा विधि विधान है, एक प्राचीन परम्परा है लोग इसको समझें -महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह –
यह निजी परंपरा है, इसलिए लोगों को सभी को आने नहीं देते हैं हम. क्यूंकि विधि विधान में खलल न पड़े. भगवान् ऐसा नहीं चाहते हैं. वे सब देखते हैं सब समझते हैं. इसमें पवित्रता का विशेष ध्यान हमें रखना होता है….लोगों को यह समझना चाहिए यह कोई मेला नहीं है. यह हमारे परिवार की पूजा है. भगवान् की पूजा है. इसमें थोड़ा से गड़बड़ होगी तो वह ठीक नहीं होता है. काफी प्राचीन परम्परा है… यह भगवान् की पूजा है.सुबह धूप आज कम थी लेकिन भगवान् पर विशवास है हमें . अब धूप निकली है. अब तेल अच्छा निकल रहा है. धूप में तेल अच्छा निकलता है. हर चीज का समय होता है. हमें उसी समय के अनुसार करना होता है. लोग समझते हैं हमें नहीं आने दिया जा रहा है.पूजा विधि विधान में कोई खलल उत्पन्न न हो इसलिए अनुशासन जरुरी है. महिलायें इतनी मेहनत करती हैं. उनकी मेहनत जाया न हो..ऐसा हम सोचते हैं. भगवान् के प्रति प्रेम है, समपर्ण है. उसी अनुसार यह काम किया जाता है.
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स्कूल से छुट्टी ले कर आई हूँ, कोशिश कर रही हूँ जैसे बड़े बता रहे हैं वैसा करने की -आहना
महारानी जी की नातिनी आहना जो स्कूल में पढ़ती हैं. वह भी आज के दिन आई हुई थी. आगे उन्हूने ही परम्परा को आगे बढ़ाना है. उनकी माता क्षीर्या कुमारी देवी भी उनके साथ थी. उन्हूने कहा, जैसे नानी ने बताया है वैसा ही मैं करने की कोशिश कर रही हूँ. मैं ११वीं कक्षा में हूँ अभी. १०वीं कक्षा पास कर के मैं आई हूँ. यह मेरा तीसरा साल है. बहुत अच्छा अनुभव रहा है मेरा. मैं बुजुर्ग महिलाओं से सीख रही हूँ. तेल निकलना थोडा ट्रिकी है…..कैसे निकाला जाता है यह बस कोशिश कर रही हूँ. उसी अनुसार सीख जाउंगी. अनुभव काफी अच्छा रहा. उल्लेखनीय है आहना बड़े समर्पित भाव से इतनी कम उम्र में भी परम्परा को निभाने में ब्यस्त दिखी. वे बड़ी मेहनत से तेल निकाल रही थी. साथ ही उनकी नानी और उनकी माता भी उनको सिखा समझा रही थी. एक अगली पीढ़ी को इस तरह परम्परा को निभाते हुए देखना काफी आनंददायक था. क्यूंकि करोड़ों भक्तों, श्रधालुओं की आस्था का विषय है. यह उनसे मन से जुड़ा हुआ है.




